एंटी-एयरक्राफ्ट व बैलिस्‍टिक मिसाइल बनाने में चीन की मदद करेगा पाक

एंटी-एयरक्राफ्ट व बैलिस्‍टिक मिसाइल बनाने में चीन की मदद करेगा पाक

बीजिंग, प्रेट्र। भारत के ‘अग्नि-5’ से चिढ़ा चीन अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। दोनों ने मिलकर बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान बनाने की योजना बनाई है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने यह जानकारी दी है।

बीते साल नवंबर में पाकिस्तानी सेना की कमान संभालने वाले जनरल कमर जावेद बाजवा इस समय चीन में हैं। उन्होंने गुरुवार को चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के तहत आने वाले ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख जनरल फांग फेंगुई से मुलाकात की थी। बाजवा ने चीन के कार्यकारी उप प्रधानमंत्री झांग गाओली, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष जनरल फेन चांगलोंग और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कमांडर जनरल ली झाउचेंगे से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक रक्षा सहयोग और परस्पर हित के दूसरे मुद्दों पर चर्चा की।

जनरल फांग ने कहा कि इस सदाबहार सामरिक साझेदारी से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सोच में बदलाव किया है। चीनी सेना में काम कर चुके सैन्य विशेषज्ञ सोंग झांगपिंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि इस बातचीत से चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य आदान-प्रदान बढ़ेगा और उसमें गहराई आएगी। सैन्य तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश मिलकर बड़े पैमाने पर एफसी-1शियोलांग लड़ाकू विमान का उत्पादन करेंगे।

इस विमान को पाक जेएफ-17 थंडर कहता है। हल्के वजन के इस विमान का कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। सोंग ने बताया कि इसके अलावा पाकिस्तान में विमानरोधी मिसाइल, जहाजरोधी मिसाइल और टैंकों का निर्माण भी चीन के एजेंडे में है। अखबार के अनुसार आतंकरोधी कार्रवाई में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों देशों में सहमति बनी है। बैठक के दौरान जनरल बाजवा ने कहा कि आतंकवाद का दृढ़ता से मुकाबला करने के लिए पाकिस्तानी सेना चीन के साथ सहयोग बढ़ाना चाहती है।

सीपीईसी की सुरक्षा के लिए 15 हजार जवानग्लोबल टाइम्स के अनुसार दोनों पक्षों ने चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की सुरक्षा का भी संकल्प जताया है। चीन में पाकिस्तान के राजदूत मसूद खालिद के मुताबिक गलियारे की सुरक्षा के लिए पाक ने 15 हजार जवान तैनात किए हैं। ग्वादर बंदरगाह की सुरक्षा के लिए सेना ने एक विशेष दस्ता तैनात किया है।

चीन के शिनजियांग प्रांत को पाक के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाला यह गलियारा गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत की आपत्तियों को नजरंदाज कर इसका निर्माण किया जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञ सोंग झांगपिंग ने बताया कि पाक को तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों से हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसे में सैन्य सहयोग जरूरी है। सैन्य सहयोग उस इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा जहां चीन ने इतना बड़ा निवेश किया है।

Courtesy: Jagran.com

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