उत्तर प्रदेश चुनाव समीक्षा: गोरखपुर का गोरखनाथ से आदित्यनाथ का सफर

उत्तर प्रदेश चुनाव समीक्षा: गोरखपुर का गोरखनाथ से आदित्यनाथ का सफर

ज़िन्दगी में कुछ घटनाएं ऐसी होती है जो हमें इतिहास के पन्ने पलटने  पर मज़बूर कर देता है| रविवार को जब दोपर के २ बजे लखनऊ में योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले  रहे थे तो मन में यका यक आया- ये कौन हैं| इनका इतिहास क्या है| फिर क्या था देखते ही देखते उत्तर प्रदेश के चुनाव के परिणाम की समीक्षा का पहला अध्याय मैंने लिखना शुरू कर दिया | अगले कुछ दिनों में मैं सिलसिलेवार तरीके से उत्तर प्रदेश चुनाव से लेकर उसके परिणमस्वरूप योगी आदित्यनाथ के चयन तक का समीक्षा लिखने जा रहा हूँ |

 

बचपन में सर्वप्रथम गोरखपुर का नाम तब सुना जब हर महीने डाकिया पिताजी के नाम से “कल्याण” पत्रिका देने आते थे| उत्सुकतावश पलट कर देखता तो रजिस्ट्री पर लिखा रहता था ‘गोरखपुर प्रेस’ से प्रकाशित | बाद में इतिहास पढ़ने पर  पता चला की गोरखपुर का इतिहास से काफी पुराना  रिश्ता है|  राप्ती और रोहिणी नामक नेपाल से निकलने वाली  दो नदियों के तट पर बसा हुआ गोरखपुर, वैदिक लेखन के मुताबिक, अयोध्या के सत्तारूढ़ ज्ञात सम्राट इक्ष्वाकु, जो सूर्यवंशी राज्य  के संस्थापक थे जिनके वंश में उत्पन्न सूर्यवंशी राजाओं में रामायण के राम को सभी अच्छी तरह से जानते हैं। पूरे क्षेत्र में अति- प्राचीन आर्य संस्कृति और सभ्यता के प्रमुख केन्द्र कोशल और मल्ल, जो सोलह महाजनपदों में दो प्रसिद्ध राज्य ईसा पूर्व छ्ठी शताब्दी में विद्यमान थे, यह उन्ही राज्यों का एक महत्वपूर्ण केन्द्र हुआ करता था।

 

उसके बाद गोरखपुर मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त और हर्ष साम्राज्यों का हिस्सा बन गया। भारत का महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जो मौर्य वंश के संस्थापक थे, उनका सम्बन्ध भी पिप्पलीवन के एक छोटे से प्राचीन गणराज्य से था। यह गणराज्य भी नेपाल की तराई और कसिया में रूपिनदेई के बीच उत्तर प्रदेश के इसी गोरखपुर जिले में स्थित था।

 

ईसा पूर्व छठी शताब्दी में गौतम बुद्ध ने सत्य की खोज के लिये जाने से पहले अपने राजसी वस्त्र यही त्याग दिये थे। बाद में उन्होने मल्ल राज्य की राजधानी कुशीनारा, जो अब कुशीनगर के रूप में जाना जाता है पर मल्ल राजा हस्तिपाल मल्ल के आँगन में अपना शरीर त्याग दिया था। कुशीनगर में आज भी इस आशय का एक स्मारक है। यह शहर भगवान बुद्ध के समकालीन 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर की यात्रा के साथ भी जुड़ा हुआ| ये सभी स्थान प्राचीन भारत के मल्ल वंश की जुड़वा राजधानियों (16 महाजनपद) के हिस्से थे। इस तरह गोरखपुर में क्षत्रिय गण संघ, जो वर्तमान समय में सैंथवार के रूप में जाना जाता है, का राज्य भी कभी था।

 

मध्यकालीन समय में, इस शहर को सन्त मत्स्येन्द्रनाथ के प्रमुख शिष्य गोरखनाथ के नाम पर रखा गया है। गोरकनाथ जी से आदित्यनाथ का सफ़र गोरखनाथ मठ के लिए काफी दिलचस्प है| गोरखनाथ को बहुत साफ़-साफ़ कहने वाले संतों में शुमार किया जाता रहा है. राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें नवीं शताब्दी का संत माना था| (याद रहे राहुल सांकृत्यायन, फ़िराक़ गोरखपुरी या रघुपति सहाय, शिब्बन लाल सक्सेना जैसे दिग्गजो का ये जन्मस्थान है|)

 

अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ योगी आदित्यनाथ इसी प्राचीन गोरखपुर मठ के मुख्या है| उनका जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था| योगी आदित्यनाथ ने हालिया विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा रैलियां की है. पूर्वांचल के बड़े नेता माने जाने वाले आदित्यनाथ की पहचान विवादित नेता के रूप में रही है| लव जेहाद, धर्मांतरण, योग, मुसलमानों के जन्मदर को लेकर आदित्यनाथ लगातार विवादित बयान देते रहे हैं.योगी आदित्यनाथ के नाम सबसे कम उम्र में सांसद बनने का रिकॉर्ड है. वह 26 साल की उम्र में सांसद बन गए थे.उन्‍होंने पहली बार 1998 में लोकसभा का चुनाव जीता था. इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार लोकसभा का चुनाव जीतते रहे|

 

गोरखनाथ मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ गोरखनाथ हठ योग का अभ्यास करने के लिये आत्म नियन्त्रण के विकास पर विशेष बल दिया करते थे और वर्षानुवर्ष एक ही मुद्रा में धूनी रमाये तपस्या किया करते थे। गोरखनाथ मन्दिर में आज भी वह धूनी की आग अनन्त काल से अनवरत सुलगती हुई चली आ रही है। योगी आदित्यनाथ का अंतिम छणो में मुख्यमंत्री बनना क्या इसी  “हठ  योग” का परिणाम था या फिर संघ और भाजपा की एक सोची समझी रणनीति से अपनी राजनीति को एक नैतिक हिंदुत्व का चेहरा देने का प्रयाश ? ये तो वही लोग बता  सकते है| लेकिन ये संघ और भाजपा के एक दूरदर्शिता भी दिखलाती है वाजपरयी / अडवाणी की विरासत को आगे बढ़ाने  वाले मोदी के उत्तराधिकारी का चुनाव पूरा कर लिया गया|

 

जिस तरह अडवाणी की तुलना में वाजपरयी मॉडरेट दिखने लगे, मोदी की तुलना में अडवाणी मॉडरेट दिखने लगे क्या आदित्यनाथ की तुलना में मोदी भी विकाश पुरुष और मॉडरेट दिखा दिए जाएंगे | इसका जवाब मेरे पास नहीं है ये तो भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है| है इतना ज़रूर कह सकता हूँ की बादल नहीं छठा है, अँधेरा और गहरा हो रहा है और कमल मुरझाया जा रहा है|

 

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