प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर फ्रॉड, लोगों से हो रही है अवैध वसूली ….

नई दिल्‍ली। जरूरतमंदों को सस्‍ते घर देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्‍कीम के नाम पर फ्रॉड हो रहा है। स्‍कीम में रजिस्‍ट्रेशन के नाम पर लोगों से दो अलग-अलग तरीकों से अवैध वसूली हो रही है। शिकायत हाउसिंग मिनिस्‍ट्री तक पहुंचने के बाद व्‍यापक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सरकार तक ऐसे पहुंची बात
यह शिकायत सबसे पहले स्‍टैंडिंग कमेटी ऑन अर्बन डेवलपमेंट तक पहुंची। इस कमेटी के एक सदस्‍य ने कमेटी की बैठक में बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर फ्रॉड हो रहा है। इस सदस्‍य खुद इसकी पड़ताल की और प्रूफ हाउसिंग सेक्रेट्री को भेजे। कमेटी ने इस बारे में मिनिस्‍ट्री से पूछताछ की तो मिनिस्‍ट्री ने इस पर अचरज जताते हुए आश्‍वासन दिया कि यह गंभीर मामला है और ऐसा फ्रॉड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह है फ्रॉड का पहला तरीका
प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत 25 जून 2015 को हुई थी। इस स्‍कीम के तहत सरकार ने इकोनॉमिक वीकर सेक्‍शन (ईडब्‍ल्‍यूएस) और लो इनकम ग्रुप (एलआईजी) को सस्‍ते घर देने का वादा किया था। इस स्‍कीम का लाभ उठाने के लिए मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड पॉवरिटी एलिवेशन (हूपा) ने ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इसके लिए सीएससी को अधिकृत किया गया है, जो केवल 25 रुपए लेकर ऑनलाइन अप्‍लाई करेंगे। लेकिन स्‍टैंडिंग कमेटी के मेंबर ने शिकायत की कि यह प्रचार किया जा रहा है कि इस स्‍कीम के तहत किसी को भी घर मिल जाएगा और प्रचार करने वाले ये लोग 500 रुपए बुकिंग के नाम पर ले रहे हैं।
यह है फ्रॉड का दूसरा तरीका
वहीं, स्‍टैंडिंग कमेटी को यह भी शिकायत की गई कि कुछ एनजीओ स्‍लम बस्तियों में जाकर 150 रुपए वसूल रहे हैं। उनका दावा है कि वे स्‍लम ब‍स्‍ती में रहने वाले लोगों को सरकार से सस्‍ते घर दिलाएंगे। स्‍टैंडिंग कमेटी ने जब इस बारे में मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग से पूछताछ की तो मिनिस्‍ट्री ने कहा कि वह इस मामले की पूरी जांच कराएंगे, क्‍योंकि दिल्‍ली अकेला ऐसा राज्‍य है, जिसने अब तक केंद्र सरकार के साथ समझौता नहीं किया है, ऐसे में वहां सस्‍ते घर की योजना लॉन्‍च ही नहीं हुई है। मिनिस्‍ट्री ने कमेटी को विश्‍वास दिलाया कि वह इस मामले की पूरी जांच करेंगे।
Courtesy: Bhaskar
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