लखनऊ में ही दम तोड़ रहीं मोदी की योजनाएं

लखनऊ में ही दम तोड़ रहीं मोदी की योजनाएं

लखनऊ  योजना मोदी सरकार की थी तो अखिलेश सरकार की साइकिल ट्रैक पर वह दौड़ नहीं सकी और उसे फाइलों में ही कैद होकर रहना पड़ा था। सियासी अखाड़े के चलते मंद गति से चली योजना हकीकत में सड़क पर उतर नहीं पाई तो शहर की जनता को इसका लाभ भी नहीं मिला। अब राज्य में योगी सरकार आई तो अफसर योजना का अमृत गिराने में लग गए हैं। जल निगम से लेकर नगर निगम तक सक्रिय हो गया है तो शासन के अफसर भी अमृत योजना की हकीकत जानने में जुट गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में भी योजना पर कोई काम नहीं हो पाया था तो चालू वित्तीय वर्ष में योजना फाइल में ही कैद रही।

सीवर से लेकर पेयजल, पार्कों का विकास समेत कई काम किए जाने थे। जवाहर लाल नेहरू रिन्यूवल मिशन के अंतर्गत शहर के कई क्षेत्रों में डाली गई सीवर योजना के कनेक्शन भी अमृत योजना में ही दिए जाने हैं लेकिन यह काम भी नहीं हो सका। पांचवे जलकल के लिए जमीन चिंहित करने में नगर निगम पीछे रहा तो वहां दीवार खड़ी करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। जल निगम के महाप्रबंधक डीएन यादव कहते हैं कि 25 करोड़ रुपये मिले हैं और अप्रैल में अमृत योजना का काम आरंभ कराया जाएगा।

शौचालय योजना भी मजाक बनी: स्वच्छ भारत अभियान में नगर निगम के कदम आगे बढ़ नहीं पाए। शौचालय बनाने का आवेदन करने वाले तो पांच हजार लोग थे लेकिन जिन 400 को योजना से जोड़ा गया और उनके यहां शौचालय बने या नहीं, इसका लेखा-जोखा तक नगर निगम के पास नहीं है। अब योगी सरकार आई तो कल स्वच्छ भारत अभियान की बैठक नगर निगम ने बुलाई है। इस योजना में शौचालय विहीन मकानों में शौचालय का निर्माण कराना और मलिन बस्तियों में सामुदायिक शौचालय बनाया जाना है।

दो हिस्सों में मिलनी थी रकम: निजी शौचालय बनवाने वाले भवन स्वामी को आठ हजार रुपये की आर्थिक मदद भी मिलनी है, जिसमे प्रथम चरण में चार हजार रुपये और काम पूरा होने पर शेष रकम दी जानी है। 400 भवन मालिकों को चार-चार हजार रुपये भी दिए गए थे लेकिन फिर नगर निगम के किसी अफसर ने यह जानने की कोशिश नहीं किया कि शौचालय बनाए गए या नहीं। इसके पीछे एक कारण यह भी था कि अखिलेश सरकार में मोदी सरकार का प्रचार करने से अफसर भी घबरा रहे थे। लिहाजा मार्च 2018 तक शहर को खुले में शौच करने मुक्त करने का नारा कैसे पूरा हो पाएगा।

क्या थी योजना: घर में शौचालय बनवाने के लिए आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। मलिन बस्तियों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण निशुल्क बनवाया जाना था।

Courtesy: Jagran.com

Categories: Politics

Related Articles