सेहत की चिंता दूर करने में शुगर टैक्स बेहतर: कोका कोला

सेहत की चिंता दूर करने में शुगर टैक्स बेहतर: कोका कोला
नई दिल्ली
दुनिया की दिग्गज कोला कंपनियों में शामिल कोका कोला के प्रेजिडेंट वेंकटेश किनी का कहना है कि जनता के स्वास्थ्य की समस्या से निपटने के लिए शुगर टैक्स बेहतर तरीका है। उन्होंने कहा, ‘फूड प्रॉडक्ट्स में शुगर, सॉल्ट या कैलरी कंटेंट के सीधे अनुपात में टैक्स लगाया जाना चाहिए। इससे सभी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा का समान माहौल बनेगा। जिस भी चीज में चीनी हो, उस पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। हमारे प्रॉडक्ट्स का पूरा पोर्टफोलियो भारत में चीनी की खपत में 1% से कम का योगदान देता है। हम शुगर बेचने के बिजनस मे नहीं, हम बेवरेजेज बेचने के बिजनस में हैं।’

किनी ने कहा कि अभी कार्बोनेशन की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी का इस्तेमाल टैक्स लगाने के लिए किया जाता है, जिससे वास्तव में कन्ज्यूमर की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि कन्ज्यूमर्स के लिए पैकेज्ड बेवरेज को लेकर आशंकाएं मुख्यतौर पर सुरक्षित हाइड्रेशन, पहुंच और अफोर्डेबिलिटी तक सीमित हैं और वो चीनी को लेकर अधिक चिंतित नहीं हैं।

किनी ने कहा, ‘हम अलग-अलग कन्ज्यूमर्स की जरूरतों को अलग तरीके से पूरा कर रहे हैं। चीनी को लेकर चिंतित रहने वाले शहरी ग्राहकों के लिए हमारे पास उत्पादों की एक रेंज है। बड़ी मात्रा में खपत वाले सेगमेंट्स के लिए हमने अपने कई ब्रैंड्ज के अलग पैकेजिंग साइज पेश किए हैं और आगे भी हम ऐसा करना जारी रखेंगे।’

तमिलनाडु में मौजूदा ट्रेड बैन पर उन्होंने कहा कि कंपनी राज्य में असोसिएशंज के साथ लगातार बातचीत कर रही है। उनका कहना था, ‘तमिलनाडु में कंपनी की सेल्स पर असर पड़ रहा है। लेकिन बातचीत जारी है और हमें उम्मीद है कि इसका कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा।’ उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ट्रेड असोसिएशंज की ओर से पानी की कमी या स्थानीय संस्कृति के बारे में जताई गई आशंकाएं वास्तविक मुद्दे हैं।

किनी ने बताया, ‘जब हमने ट्रेड असोसिएशंज को बताया कि हमने उनके लिए क्या किया है और हम राज्य से कितने कम पानी का इस्तेमाल वास्तव में करते हैं और हम अपने इस्तेमाल से अधिक पानी वापस देते हैं तो इससे एसोसिएशंज की नाराजगी कम हुई थी।’ उन्होंने कहा कि यह समस्या अभी नहीं सुलझी है। कंपनी ने यह सीखा है कि उसे अपनी बात सक्रियता से रखनी चाहिए और समस्याओं के पैदा होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

पिछली पांच-छह तिमाहियों में भारत में सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री इकाई अंक में बढ़ी है जो इसका निचला स्तर है। किनी ने कहा कि इसके पीछे दो वर्ष मॉनसून खराब रहना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मंदी और नोटबंदी जैसे कारण हैं। कोका कोला नॉन-कोला ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स, डेयरी, रेडी-टु-ड्रिंक टी और कॉफी और फ्लेवर्ड वॉटर की उपलब्धता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी की भारत में सेल्स में अब नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की हिस्सेदारी बढ़कर 40% की हो गई है। किनी ने कहा कि कंपनी के पास जीरो या लो-कैलरी वाली बेवरेजेज की एक रेंज मौजूद है जिसमें कोई शुगर नहीं है।

Courtesy: NBT
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