भाजपा ने देश का 10 लाख करोड़ का नुकसान कर दिया’

भाजपा ने देश का 10 लाख करोड़ का नुकसान कर दिया’

नई दिल्ली। जीएसटी से जुड़े चार विधेयकों पर लोकसभा में जारी चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने जीएसटी लागू करने में देर कर देश को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का चूना लगाया है। मोइली ने कहा कि यूपीए सरकार इसे अप्रैल 2010 से ही लागू करना चाहती थी। अभी लोकसभा में जीएसटी से जुड़े चार बिलों पर चर्चा हो रही है। सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेंसेशन जीएसटी बिलों को एक साथ सदन के पटल पर रखा था।
विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने जीएसटी पर कई सवाल खड़े किए और इसके गेमजेंचर होने के सरकार के दावे को खारिज कर दिया। मोइली ने कहा कि यह कोई गेमचेंजर नहीं, बल्कि बहुत छोटा कदम है। उन्होंने इस बात को भी जोर-शोर से उठाया कि जब उनकी सरकार जीएसटी पर आगे बढ़ना चाह रही थी, तो तब विपक्ष में बैठी बीजेपी ने अड़ंगा लगा दिया। मोइली ने पूछा, ‘अब जब जीएसटी को 6 साल बाद लागू किया जा रहा है, तो इस दौरान हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है?’ मोइली ने आगे कहा, ‘जीएसटी नहीं लागू होने की वजह से सालाना 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस तरह अब तक देश को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।’

 
लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने इसे गेमचेंजर बताया और बिल के कुछ प्रावधानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत खाने-पीने के जरूरी सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यानी, पहला टैक्स स्लैब शून्य होगा जबकि दूसरा स्लैब- 5% और तीसरा स्लैब 12% और 18% का है। जेटली ने कहा कि लग्जरी टैक्स स्लैब को दो भागों में बांटा गया है- टैक्स और सेस। इसमें टैक्स की दर 28 प्रतिशत होगी।

 
वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू करने से शुरुआती 5 वर्षों तक जिन राज्यों को नुकसान होगा, उनकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी। इस व्यवस्था की जानकारी देते हुए जेटली ने कहा, ‘अभी लग्जरी सामानों पर टैक्स की दर 40 से 65 प्रतिशत तक है। जीएसटी में हम ऐसे सामानों पर 28 प्रतिशत का टैक्स लेंगे। इसके बाद का हिस्से से एक बफर स्टॉक बनेगा जिससे उन राज्यों की मदद की जाएगी, जिन्हें जीएसटी से नुकसान होगा। इसके बाद भी फंड बच जाएगा तो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इसका बंटवारा हो जाएगा।’ जेटली ने कहा कि जीएसटी के तहत ही राज्यों के नुकसान की भरपाई का इंतजाम कर जनता को टैक्स के अतिरिक्त बोझ से बचा लिया गया।

 

 

आपको बता दें कि पिछली यूपीए सरकार अप्रैल 2010 में ही जीएसटी को लागू करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन, विपक्ष के विरोध के बीच जीएसटी बिल पास नहीं हो पाया। फिर इसकी मियाद बढ़ाकर अप्रैल 2011 कर दी गई, लेकिन तब भी तत्कालीन सरकार को सफलता नहीं मिली।

 
दरअसल, टैक्स सुधार को लेकर वाजपेयी सरकार ने ही साल 2000 में एक कमिटी गठित की थी। साल 2004 में केलकर कमिटी ने जीएसटी का सुझाव दिया। फिर साल 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जीएसटी को अप्रैल 2010 से लागू करने का प्रस्ताव रखा और कहा कि इसके क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य के बीच टैक्स की साझेदारी रहेगी। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर इसे अप्रैल 2011 से लागू करने का ऐलान किया गया।

 

 

यूपीए सरकार एक बार फिर इस टैक्स सुधार लागू करने में नाकाम रही और 2011 में 115वां संविधान संशोधन विधेयक पेश कर विधेयक को स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजा गया। साल 2013 में संसद में स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट पेश हुई। साल 2014 में सत्ता में आई बीजेपी ने जोर लगाया और 122वां संविधान संशोधन बिल पेश हुआ और अब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई 2016 से पूरे देश में जीएसटी लागू करने की मंशा जताई।

 

Courtesy: nationaldastak

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