बीजेपी के ‘गाय प्रेम’ पर ओवैसी ने कसा तंज, कहा- यूपी में ममी, पूर्वोत्तर में यमी

बीजेपी के ‘गाय प्रेम’ पर ओवैसी ने कसा तंज, कहा- यूपी में ममी, पूर्वोत्तर में यमी

नई दिल्ली
AIMIM के मुखिया और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गाय के मुद्दे पर बीजेपी को एक बार फिर आड़े हाथों लिया है। बीजेपी के ‘गाय प्रेम’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी इलाके के हिसाब से इस मुद्दे पर अपना स्टैंड बदल लेती है। ओवैसी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपी में बीजेपी के लिए गाय ममी है और पूर्वात्तर में यमी है। साथ ही ओवैसी ने कहा कि यूपी में बूचड़खानों पर हो रही कार्रवाई से लाखों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। ओवैसी ने हाल ही में यूपी में बूचड़खानों पर की जा रही कार्रवाई का मामला संसद में भी उठाया था।

शनिवार को ओवैसी ने कहा, ‘बीजेपी का पाखंड यह है कि उत्तर प्रदेश में उसके लिए गाय ममी है, लेकिन नॉर्थ ईस्ट में वह यमी है।’ बता दें कि पूर्वोत्तर के राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध नहीं है। असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में सत्ता में होने के बावजूद बीजेपी ने वहां गोहत्या पर कोई बैन नहीं लगाया है। बूचड़खानों पर भी वहां कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब राजनीतिक विरोधी इसी को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अगले साल मिजोरम सहित तीन पूर्वोत्तर के राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है और बीजेपी ने अभी से साफ कर दिया है कि अगर वह सत्ता में आती है तो गोहत्या पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ ने जब बीजेपी के मिजोरम प्रदेश अध्यक्ष से जेवी हुमा से पूछा कि नॉर्थ ईस्ट के लोगों में बीफ-शराब बैन को लेकर डर है तो उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि राज्य में ऐसा कोई बैन नहीं लगेगा। स्वास्थ्य कारणों से कुछ बूचड़खानों पर बैन लगााया गया है। बिना इजाजत के कुछ लोग गलियों में बूचड़खाने चला रहे थे। इसलिए हाइजीन के लिए उन्हें रोका गया। लेकिन अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो मुझे विश्वास है कि ऐसा बैन नहीं लगाया जाएगा।’

बता दें कि पूर्वोत्तर के राज्यो में ईसाई धर्म के लोगों की आबादी ज्यादा है और यहां बीफ बड़ी मात्रा में खाया जाता है। बहरहाल, यूपी में योगी सरकार बनने के बाद बूचड़खानों पर चल रही कार्रवाई पर ओवैसी लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। सोमवार को लोकसभा में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि यूपी में न सिर्फ अवैध बल्कि वैध बूचड़खाने भी बंद कराए जा रहे हैं। ओवैसी ने कहा था कि जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय सरकार को बूचड़खाना संचालकों को वक्त देना चाहिए था।

कालेधन से तुलना करते हुए औवेसी ने यह भी कहा था कि अगर सरकार कालाधन रखने वालों को संपत्ति घोषणा का वक्त दे सकती है तो बूचड़खानों को नियमित करने का समय क्यों नहीं दिया जा सकता। ओवैसी ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई की आड़ में एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

Courtesy: NBT
Categories: India

Related Articles