प्रधानमंत्री से भी नहीं मिला न्याय, अब ‘शोषण’ के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 200 सीआईएसएफ जवान

प्रधानमंत्री से भी नहीं मिला न्याय, अब ‘शोषण’ के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 200 सीआईएसएफ जवान

केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा कई तरह की दिक्कतों का सामना करने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के काम करने, खराब खाने और भत्तों का भुगतान न होने तथा कथित रूप से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने के कई मामले आ चुके हैं। इसे लेकर अब जवानों ने कानूनी सहायता की ओर रुख किया है। सुरक्षाकर्मी आंतरिक शिकायत दर्ज कराने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑफिस (पीएमओ) तक जा चुके हैं। लेकिन समाधान नहीं निकलने के बाद अब केम्पेगौडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (केआईए) पर तैनात 200 से ज्यादा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने सामूहिक रूप से कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने गृह मंत्रालाय के हवाले से बताया कि पिछले तीन साल में 344 सुरक्षाकर्मी सुसाइड कर चुके हैं, जिनमें से 15 लोगों ने साल 2017 के पहले तीन महीने में आत्महत्या की है। कुल आंकड़ों का 15 प्रतिशत (53 सुरक्षाकर्मी) सीआईएसएफ के हैं। इसके अलावा 25 मामले ऐसे है, जिनमें सुरक्षाकर्मी ने अपने सहयोगी की हत्या की या फिर उस पर फायरिंग की। इसमें 52 प्रतिशत (13 केस) मामले सीआईएसएफ से जुड़े हुए हैं। जनवरी 2017 में केम्पेगौडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर एक सीआईएसएफ के जवान ने खुद को गोली मार ली थी। हालांकि उसकी खुदकुशी की वजह को निजी कारण बताया गया था। इसी तरह, अगस्त 2016 में इंडिया गेट के पास जनपथ स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में तैनात सीआईएसएफ के जवान 30 साल के मुन्ना कुमार राय ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। केंद्रीय सुरक्षा बलों में इस तरह मामले सामने आना चिंता विषय है।

हर साल 100 से ज्यादा जवान करते हैं सुसाइड
सरकार की हरसंभव कोशिश और उसके द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद हर साल 100 से ज्यादा जवान आत्महत्या करते हैं। साल 2016 में विभिन्न परिस्थितियों में 125 जवानों ने सुसाइड किया था। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने पिछले महीने में लोकसभा में सवाल के जवाब में कहा था कि 101 सैनिक, 19 एयरमैन और 5 नाविकों ने पिछले साल खुदकुशी कर ली। इसके अलावा साथी जवानों की हत्याओं के भी 3 गंभीर मामले सामने आए। 2017 में 13 आर्मी जवान खुदकुशी कर चुके हैं।

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कई मामले आए सामने

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर भी जवानों के कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिसमें बताया गया है कि उन्हें किसी परिस्थिति में रहना होता है और उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में सेना के जवान सिंधव जोगीदास ने सेना के कुछ ऑफिसरों पर जवानों को अपना गुलाम समझने का आरोप लगाया। वह छुट्टी से दो दिन लेट आया, जिसकी सजा के रूप में जबरदस्ती सहायक ड्यूटी पर लगा दिया गया। मैं पहले से ही 2014 में इस सहायक ड्यूटी को कर चुका था इसलिए मैने मना कर दिया। तब तो मुझे कुछ नहीं कहा गया लेकिन बाद में मेरा शोषण किया गया। इससे पहले जवान तेज बहादुर का वीडियो सामने आया था।

Courtesy:jansatta

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