जहाँ 36 हजार बच्चे कुपोषित हैं वहां डिप्टी सीएम के माथे पर सजा चांदी का ताज

जहाँ 36 हजार बच्चे कुपोषित हैं वहां डिप्टी सीएम के माथे पर सजा चांदी का ताज

।उत्तर प्रदेश का कौशाम्बी जिला यूँ तो अपनी ऐतिहासिकता की वजह से देश दुनिया में जाना जाता है लेकिन इस जिले की एक और पहचान है। इस जिले के बच्चों में कुपोषण का प्रतिशत न केवल यूपी बल्कि देश के अन्य तमाम राज्यों के कुपोषण प्रभावित जिलों से ज्यादा है। मौजूदा समय में कौशाम्बी जिले के लगभग 36 हजार बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। वहीँ 15 से 49 वर्ष की विवाहित अविवाहित 50 से ज्यादा महिलाएं 24.7 फीसदी पुरुष एनीमिया के शिकार है।प्रदेश सरकार द्वारा पिछले एक दशक के दौरान इन बच्चों की स्थिति सुधारने के लिए तमाम दावे और वायदे किये गए लेकिन इनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ।

कुपोषण से हर वर्ष होती हैं मौतें

कौशाम्बी में बच्चों की कुपोषण की स्थिति किस हदतक खराब है इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हर वर्ष कुपोषण की वजह से जिले में मौतें होती है। 2013 में विधि छात्रों की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिले में कुपोषण की स्थिति पर प्रशासन से जवाब भी तलब किया था। लेकिन हालात बिलकुल भी नहीं बदले। जो आंकड़े हैं उनसे पता चलता है कि कुपोषित बच्चों में से तक़रीबन 10 फीसदी बच्चे अति कुपोषित हैं।इन बच्चों की सेहत सुधारने के लिए राज्य पोषण मिशन योजना चलाई गई। लेकिन इसका कोई ख़ास फायदा नहीं हुआ है केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि कौशाम्बी जिले में आज भी 52.8 फीसदी बच्चों का वजन सामान्य से कम है। गौरतलब है कि कौशाम्बी में कुपोषण की समस्या 17 गाँवों में सर्वाधिक है इनमे से कई गाँव केशव प्रसाद मौर्या के गृह क्षेत्र सिराथुल में आते हैं।

सरकार और प्रशासन पूरी तरह से फेल

कुछ समय पूर्व राज्य पोषण मिशन के तहत जिले में संभावित कुल 28 हजार 694 महिलाओं को चिह्नित किया गया। 26 हजार 574 महिलाओं के खून की जांच की गई तो नौ हजार 650 महिलाएं एनीमिक मिलीं। इनमें से 532 महिलाएं अभी भी खून की कमी से जूझ रही हैं। कुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए हौसला पोषण योजना लागू की गई है, लेकिन ये योजना भी कारगर साबित नहीं हो रही है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद 2013 में कौशाम्बी जिले से बड़े पैमाने पर कुपोषण के शिकार बच्चों के मौत की ख़बरें आई थी वही गर्भस्थ शिशुओं के मौत के मामले सामने आये थे। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को गाँव गोद लेकर स्थिति में सुधार लाने को कहा था लेकिन हालात में तनिक भी सुधार नहीं हुआ।कौशाम्बी के अनिरुद्ध सिंह कहते हैं ‘केशव प्रसाद मौर्या से अपेक्षा की जाती है कि वो इस जिले में महिला और बाल स्वास्थ्य की दिशा में कुछ ख़ास करेंगे लेकिन जिस तरह से वो सोना चांदी पहन रहे है हम निराश हुए हैं’।

Courtesy: patrika

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