शराब ही नहीं चखने को भी लगी सुप्रीम कोर्ट के चाबुक की चोट, बिक्री 10-30 फीसदी गिरी

नई दिल्ली 
रम के साथ जमता था कोला, वोदका का टेस्ट जूस तो व्हिस्की का टेस्ट सोडा बढ़ाता था। इन सबका सुरूर तब चढ़ता था, जब उसके साथ चलती थी मूंगफलियां, नमकीन और चिप्स। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से जब जाम सूखे रहने लगे तो फिर चखने को कौन पूछता है। नैशनल और स्टेट हाइवे के 500 मीटर के दायरे में शराब बैन का नेगेटिव असर फूड और बेवरेजेज की सेल पर पड़ा है।

एक अप्रैल से अब तक सोडा, पैकेज्ड वॉटर, जूस, पैकेज्ड चिप्स, मूंगफली, नमकीन और स्टार्टर्स जैसे आइटम्स की सेल्स में 10-30 पर्सेंट तक गिरावट देखने को मिली है। इकनॉमिक टाइम्स को ये जानकारी कंपनियों और रेस्तरां वालों ने दी है। हाइवे किनारे शराब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट का बैन इसी महीने की एक तारीख को लागू हुआ था। कॉर्निटोज नाचोज ब्रैंडनेम से स्नैक्स बेचने वाली ग्रीनदूत हेल्थ फूड्स के प्रमोटर विक्रम के मुताबिक, ‘पैकेज्ड फूड्स पर शर्तिया दबाव बना है, क्योंकि इसकी सेल्स का हाइवे किनारे शराब के कंज़ंप्शन से गहरा नाता रहा है।’ उन्होंने बताया कि बैन के बाद से उनके स्नैक्स ब्रैंड की सेल में 10 पर्सेंट तक गिरावट आई है।

एक दिग्गज पैकेज्ड स्नैक्स कंपनी के हेड ने पहचान जाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, ‘बैन से पिछले दस दिन में सेल्स बहुत घट गई है। हमें लगता है कि इसमें गिरावट कुछ समय तक जारी रहेगी।’ फाइन डाइनिंग ऑलिव बिस्ट्रो और सोडा बॉटल ओपनरवाला के मैनेजिंग डायरेक्टर एडी सिंह की मानें तो उनके गुड़गांव और मुंबई वाले चार रेस्तरां का बिजनस 30 से 50 फीसदी गिर गया है। उन्होंने कहा, ‘लिकर बैन और शराब के साथ बिकनेवाली डिशेज की डिमांड में आई गिरावट के चलते औसत बिलिंग 30 से 40 पर्सेंट तक घट गई है।’

कंसल्टेंसी फर्म टेक्नोपैक की फूड सर्विसेज रिपोर्ट में होटलों, रेस्तरां, पब, बार और कैफे का अनुमानित लिकर सर्विस रेवेन्यू 2016 में 22,000 करोड़ रुपये था। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और नट्स, चिप्स, नाचोज और फ्राइज की सेल लिकर सर्विसेज रेवेन्यू के 30 पर्सेंट के बराबर है। इस हिसाब से इसकी टोटल सेल 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। लिकर बैन से कुल 65,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू लॉस और 10 लाख लोगों का रोजगार छिनने का डर है।

द बीयर कैफे के प्रमोटर राहुल सिंह कहते हैं, ‘हमारे बिजनस में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमी सिर्फ इस वजह से आई है कि लिकर बैन के बाद शराब के साथ लिए जाने वाले सामान जैसे स्नैक्स, पैकेज्ड जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और पैकेज्ड वाटर वगैरह की खपत कम हो गई है।’ बीयर कैफे के 35 स्टोर्स हैं जिनमें से गुड़गांव, मुंबई और पुणे के चार स्टोर हाइवे किनारे लिकर बैन से प्रभावित हुए हैं। लाइट बाइट फूड्स के चेयरमैन अमित बर्मन के मुताबिक गुड़गांव के साइबर हब वाले उनके पंजाब ग्रिल टप्पा रेस्तरां की सेल्स बैन के बाद से 15 पर्सेंट तक घट गई है।

Courtesy: NBT

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