मोदी जी, भीम ऐप से नहीं बनेगा बाबा साहब के सपनों का भारत- कन्हैया कुमार

मोदी जी, भीम ऐप से नहीं बनेगा बाबा साहब के सपनों का भारत- कन्हैया कुमार

नई दिल्ली। 14 अप्रैल को देशभर में भारत रत्न और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 126वीं जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई। जेएनयू छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार ने भी बाबा साहब डॉ.भीमराव  अंबेडकर को उनकी 126वीं जयंती पर उन्हें याद किया। अक्सर अपने भाषणों से चर्चाओं में रहने वाले कन्हैया कुमार अब सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। अंबेडकर जंयती पर उन्होने एक विस्तृत फेसबुक पोस्ट लिखा।
फेसबुक पोस्ट में कन्हैया ने लिखा, “आज नागपुर में दीक्षा भूमि जाकर बाबासाहेब की जयंती मनाते समय बार-बार उनके शब्द याद आ रहे हैं–“शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो”। ये शब्द हमें देश को तोड़ने वाले उन नेताओं की साज़िश को नाकाम करने की ऊर्जा और हिम्मत देते हैं जो एक तरफ़ तो आंबेडकर की मूर्ति पर माला चढ़ाते हैं तो दूसरी तरफ़ उनके तमाम मूल्यों को मिट्टी में मिलाने की साज़िश रचते हैं।”

 

शोध कार्यक्रमों में एडमिशन न होना अंबेडकर के सपनों की हत्या

उन्होने आगे लिखा, ‘पहले शिक्षा की बात करूँगा। क्या उन लोगों को आंबेडकर जी का नाम लेने का नैतिक अधिकार है जिन्होंने जेएनयू की सीटों में 83 प्रतिशत कटौती करके उन दलितों, आदिवासियों आदि के सपनों की हत्या की जिनके अधिकारों के लिए आंबेडकर जीवन भर संघर्ष करते रहे? जिस प्रवेश नीति ने जेएनयू को शोषित तबकों की उम्मीद बनाया, उसे ख़त्म करने वाले लोग जब आंबेडकर के सिद्धांतों की बात करते हैं तो अजीब लगता है। इतिहास, राजनीति विज्ञान और दूसरे विषयों के 60 से ज़्यादा रिसर्च प्रोग्रामों में एक भी सीट पर एडमिशन नहीं होने देना असल में आंबेडकर के सपनों की हत्या है। क्या यह आंबेडकर के रास्ते पर चलने की बात कहने वाले देश के लिए शर्म की बात नहीं है कि इस साल जेएनयू के स्त्री अध्ययन केंद्र में एक भी सीट पर एडमिशन नहीं होगा?”

 
निर्धन विद्यार्थी किडनी बेचकर करेंगे पढ़ाई?

कन्हैया ने लिखा, ‘अब बात करूँगा संघर्ष की। जब हम अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं तो हमें देशद्रोही कहा जाता है। कहीं पाँच हज़ार रुपये की फ़ीस को बढ़ाकर 50,000 रुपये कर देने वाली तो कहीं सीधे स्कूल-कॉलेज बंद कर देने वाली सरकारों के ख़िलाफ़ हम बार-बार आवाज़ उठाएँगे। क्या सरकार यह उम्मीद करती है कि ग़रीब विद्यार्थी किडनी बेचकर बीए-एमए की पढ़ाई करेंगे? शिक्षा हमारा अधिकार है और जो सरकार यह अधिकार नहीं दे सकती उसे हम उसके कर्तव्य की याद दिलाना जानते हैं।’

 

सरकार पर लगाया आरोप

उन्होने कहा, ”आंबेडकर जी ने हमें संगठित होने को कहा, लेकिन अभी जो सरकार है उसने संगठित होने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। आरटीआई आवेदन करने वाले की मृत्यु होने पर आवेदन से जुड़े मामले को ख़त्म करने का कानून बनाने की कोशिश कर रही सरकार किसका हौसला बढ़ा रही है–अपराधियों का या नागरिकों का?”

 

भीम ऐप से नहीं, संघर्षो से पूरे होंगे बाबा साहब के सपने

कन्हैया ने कहा, “हम बाबासाहेब के सपनों का भारत ज़रूर बनाएँगे। यह भारत हम भीम ऐप इंस्टॉल करके नहीं बना सकते। इसके लिए हर कदम पर संघर्ष करना होगा। उन लोगों के ख़िलाफ़ जो संवैधानिक पद पर रहते हुए भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कहते हैं।”

Courtesy: NDTV

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