अमेरिकी वीजा रूल्स में सख्ती से आईटी कंपनियों में हो सकती है छंटनी: एसोचैम

नई दिल्ली.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच1बी वीजा के नियम सख्त करने के फैसले पर साइन कर दिए हैं। अब भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वहां जाकर काम करना मुश्किल हो जाएगा। भारतीय आईटी कंपनियों का 60% बिजनेस नॉर्थ अमेरिका से ही आता है। एसोचैम ने एक रिपोर्ट में कहा कि वीजा नियमों में सख्ती से भारतीय कंपनियों में छंटनी की नौबत आ सकती है। एच1बी वीजा 60% से भी कम रह जाएगा…

– एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक, कंप्यूटर सेगमेंट में जितने एच1बी वीजा होते हैं, उनका 86% भारतीयों को जाता है। सख्ती के बाद यह 60% से भी कम रह जाएगा।

– एचसीएल के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने कहा कि इस फैसले के दो असर दिखेंगे। पहला- जिन आईटी इंजीनियरों का वीजा रिन्यू नहीं होगा, उनके लौटने से डोमेस्टिक मार्केट में ओवर सप्लाई की स्थिति बनेगी। दूसरा- खर्च बढ़ने से कंपनियों का मार्जिन कम होगा।

– एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका से भारत पैसे भेजे जाने (रेमिटेंस) में कमी आएगी और भुगतान संतुलन बिगड़ेगा। वर्ल्ड बैंक के डाटा के मुताबिक 2015 में सऊदी अरब के बाद सबसे अधिक रेमिटेंस अमेरिका से ही आया। यह 10.96 अरब डॉलर था जो कुल रेमिटेंस का 16% था। हालांकि, नए ऑर्डर को पूरी तरह लागू होने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि इसके लिए कई रूल्स बदलने पड़ेंगे।

लॉटरी सिस्टम से ही वीजा मिलेगा

-अमेरिका हर साल 65,000 एच1बी वीजा जारी करता है। इसके अलावा अमेरिकी एजुकेशन इंस्टीयूट से मास्टर्स या इससे बड़ी डिग्री लेने वाले 20,000 लोगों को वीजा देता है। इसका बड़ा हिस्सा भारतीय प्रोफेशनल्स के हिस्से जाता है।

– आईटी इंडस्ट्री बॉडी नैस्कॉम का कहना है कि अमेरिका में आईटी, हेल्थकेयर, एजुकेशन और दूसरे सेक्टर्स में हायर एजुकेटेड टैलेंट की कमी है। अमेरिकी सांसदों ने वीजा रूल्स बदलने के लिए सात-आठ बिल पेश किए हैं।

– नैस्कॉम का कहना है कि इनमें भारतीय कंपनियों को टार्गेट किया गया है। 2017-18 में लॉटरी सिस्टम से ही वीजा मिलेगा। इसलिए भारतीय कंपनियों पर फौरन ज्यादा असर नहीं होगा।

-इन्फोसिस ने एक बयान में कहा कि कंपनी जिस देश में ऑपरेट करती है वहां पहले ही स्थानीय लोगों को हायर करना शुरू कर दिया है। टीसीएस ने कहा है कि वह अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करेगी।

एल1ए या ईबी 5 वीजा ऑप्शन

-भारतीय कंपनियां एल1ए या ईबी5 वीजा के लिए एप्लीकेशन दे सकती हैं। एल1 वीजा के तहत मैनेजर, एक्जीक्यूटिव या विशेष नॉलेज कैटेगरी वाले विदेशी कर्मचारी को कुछ वक्त के लिए अमेरिका ट्रांसफर किया जा सकता है। हाल के दिनों में भारत से ईबी5 वीजा के लिए एप्लीकेशन बढ़ी हैं। यह महंगा पड़ता है। एप्लीकेशन देने वाले को टार्गेटेड एंप्लॉयमेंट एरिया (टीईए) में 5 लाख डॉलर या नॉन-टीईए में 10 लाख डॉलर निवेश करना पड़ता है। निवेश से कम से कम 10 लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए।

– अब एक्सपर्ट्स को ही अब विशेषज्ञ की जरूरत वाले काम के लिए ही एच1बी वीजा लिया जा सकता है। उन्हें कम से कम 1.3 लाख डॉलर (84.5 लाख रु.) सालाना देना होगा। अभी तक न्यूनतम वेतन 60 हजार डॉलर (39 लाख रु.) था।

जेटली अमेरिका रवाना, अधिकारियों के साथ वहां वीजा मुद्दे पर होगी बात
– अरुण जेटली ने कहा कि अमेरिका दौरे में वह अमेरिकी अफसरों के सामने वीजा का मुद्दा उठाएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री स्टीवन मुचिन से भी उनकी मुलाकात तय है।
Courtesy: Bhaskar.com

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