CBSE में हिंदी अनिवार्य! बीजेपी अपने नारे ‘हिंदी, हिन्दू और हिन्दुस्तान’ पर अग्रसर

CBSE में हिंदी अनिवार्य! बीजेपी अपने नारे ‘हिंदी, हिन्दू और हिन्दुस्तान’ पर अग्रसर

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों के लिए 10वीं कक्षा तक हिन्दी पढ़ना अनिवार्य हो सकता है, क्योंकि इस संबंध में एक संसदीय समिति की सिफारिश को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।

 

सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालय में हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले का कुछ गैर हिंदी भाषी राज्यों ने विरोध किया है। राष्ट्रपति की अनुमति के बाद लिए गए इस फैसले पर कुछ राज्य सरकारों ने केंद्र पर अन्य भाषाओं को दबाने का आरोप लगाया है।

 

टीएमसी के सौगात रॉय ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि इसे फैसले को लागू कर बीजेपी अपने नारे ‘हिंदी, हिन्दू और हिन्दुस्तान’ को साकार करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘गैर हिंदी भाषी राज्यों में इस तरह का फैसला लागू करने से पहले केंद्र सरकार ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था’

 

 

राष्ट्रपति की तरफ से जारी 31 मार्च के आदेश में एचआरडी मिनिस्ट्री से हिंदी को अनिवार्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए कहा था। आदेश में कहा गया, ‘पहले कदम के तौर पर, हिंदी को सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालयों में दसवीं क्लास तक अनिवार्य किया जाए।’ सीबीएसई के भारत में 18,546 और 210 स्कूल अन्य 25 देशों में हैं।

 

 

बता दें कि संसदीय समिति की ओर से दी गई सिफारिशों में अधिकतर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा मंजूरी मिल गयी है। राष्ट्रपति ने जिन सिफारिशों को मंजूरी दी है उनमें से एक सिफारिश यह भी थी कि 10 वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए हिन्दी को अनिवार्य बनाया जाए। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) से भी समिति ने कहा है कि पाठ्यक्रमों में हिन्दी भाषा को अनिवार्य बनाए जाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए कहा है।

 

 

तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी डीएमके के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि केंद्र ने पहले भी हाइवेज पर लगे बोर्ड पर हिंदी में नाम लिखवाए, अखबारों में हिंदी में विज्ञापन भी छापे गए, यहां तक कि टीचर्स डे को गुरु पूर्णिमा कहा गया। स्टालिन ने कहा, ‘मैं केंद्र सरकार को चेतावनी देना चाहता हूं कि एक और हिंदी विरोधी आंदोलन के बीज मत बोइए।’

 
केरल में, इस कदम को एक चुनौती मिली है, जहां राज्य सरकार ने 11 अप्रैल को अध्यादेश पारित कर सभी स्कूलों में 10वीं क्लास तक मलयालम भाषा को अनिवार्य किया गया। इस नए आदेश के बाद, सीबीएसई स्कूलों को अपने पूरे पाठ्यक्रम को बदलना पड़ सकता है ताकि अंग्रेजी सहित तीन अनिवार्य भाषाओं को उसमें समायोजित किया जा सके।

 

तेलंगाना के शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘जब उत्तर भारत के लोग किसी भी दक्षिण भारतीय भाषा को सीखने में कोई रुचि नहीं दिखाते हैं, तो हमारे बच्चों पर कोई एक भाषा सीखने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है।’

 

 

असम में कक्षा 10 तक असमिया भाषा अनिवार्य करने की तैयारी की जा रही है। यह जानकारी बुधवार को राज्य के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा ने दी। हालांकि बंगाली बोले जाने वाले इलाकों में स्टूडेंट्स के पास बंगाली और असमिया के चु

Courtesy: nationaldastak

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