चीन का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च, भारत से कहा था- विकास पर ध्यान दो

चीन का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च, भारत से कहा था- विकास पर ध्यान दो

नई दिल्ली/बीजिंग. चीन ने 70 हजार टन वजनी अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) बुधवार को लॉन्च कर दिया। सरकारी मीडिया के मुताबिक पूरी तरह देश में डिजाइन इस एयरक्राफ्ट कैरियर को डालियान के उत्तर-पूर्व बंदरगाह पर बनाया गया है। बता दें कि चीन ने कुछ दिनों पहले ही भारत को नसीहत दी थी कि वह एयरक्राफ्ट कैरियर बनाना छोड़कर अपनी अर्थव्यवस्था के विकास पर ध्यान दे। नवंबर 2013 में बनाना शुरू किया था

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने एयरक्राफ्ट कैरियर टाइप 001A बनाए जाने का एलान किया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग ने यह कामयाबी तब हासिल की है, जब नॉर्थ कोरिया और साउथ चाइना सी में चीन के मवूमेंट को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन ने 23 अप्रैल को ही अपनी नौसेना की स्थापना की 68वीं सालगिरह मनाई है।

– हालांकि मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस एयरक्राफ्ट कैरियर के 2020 तक सर्विस शुरू करने की उम्मीद नहीं है। चीन ने यह एयरक्राफ्ट कैरियर नवंबर 2013 में बनाना शुरू किया था।

टाइप 001A एक नई श्रेणी का कैरियर
– चीन का टाइप 001A एक नई श्रेणी का कैरियर है। बीजिंग का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर लियोनिंग सेकंड हैंड सोवियत बिल्ट शिप था, जिसे 25 साल पहले बनाया गया था। बड़ी मरम्मत के बाद लियोनिंग 2012 में कमीशंड हुआ था।

भारत से कहा था अपनी इकोनॉमी के डेवलपमेंट पर ध्यान दो
– चीन के सरकारी मीडिया ने 24 अप्रैल को भारत को नसीहत दी थी। कहा था, “भारत को हिंद महासागर में चीन को रोकने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की प्रॉसेस तेज करने के बजाए अपने इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए।” ग्लोबल टाइम्स ने अपने आर्टिकल में कहा था, “एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के लिए भारत कुछ ज्यादा ही बेसब्र हो रहा है। यह देश अभी इंडस्ट्रियलाइजेशन (औद्योगीकरण) के शुरुआती चरण में है और ऐसे में एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के रास्ते में कई तकनीकी रुकावटें आएंगी।”
– “पिछले कुछ दशकों में एयरक्राफ्ट कैरियर के मामले में भारत और चीन के रास्ते अलग रहे हैं, लेकिन दोनों देशों को जो अलग नतीजे हासिल हुए हैं, वह इकोनॉमिक डेवलपमेंट की अहमियत की ओर इशारा करते हैं। लिहाजा हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब में नई दिल्ली को एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की प्रॉसेस को तेज करने के लिए अपनी आतुरता कुछ कम करनी चाहिए और अपनी इकोनॉमी पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।”

Courtesy: Bhaskar

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