NPA से निपटने के लिए सरकार लाएगी अध्यादेश, बैंकिंग एक्ट में होगा बदलाव

NPA से निपटने के लिए सरकार लाएगी अध्यादेश, बैंकिंग एक्ट में होगा बदलाव

नई दिल्ली. पब्लिक सेक्टर बैंकों के बैड लोन (एनपीए) की समस्या से निपटने के लिए सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी। इस अध्‍यादेश के जरिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में बदलाव किया जाएगा। कैबिनेट की मीटिंग में यह अहम फैसला हुआ। इसे जल्द ही राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। फाइनेंस मिनिस्ट्री सूत्रों के अनुसार नए अध्‍यादेश से आरबीआई को यह अधिकार मिलेगा कि एनपीए के इश्‍यू पर  समय समय पर बैंकों को डायरेक्शन दे सके।

बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़े निर्णय

बता दें कि पीएसयू बैंकों के बैड लोन यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स बड़ी समस्या बन गया है। बैंकों का एनपीए 6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कैबिनेट की मीटिंग के बाद फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा कि बैंकों के बैड लोन की समस्या से निपटने के लिए सरकार कुछ बड़े कदम उठाने जा रही है। बैंकिंग सेक्टर के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ प्रपोजल राष्‍ट्रपति की मंजूरी के लिए गए हैं। जैसे ही मंजूरी मिल जाती है, नए नॉर्म्स का एलान कर दिया जाएगा।

क्या हो सकती है सरकार की पॉलिसी

एक पब्लिक सेक्टर बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एनपीए की समसया से निपटने के लिए हेयरकट (जितना अमाउंट जितना कर्जदार देने में सक्षम उतना ही स्वीकार कर लिया जाय) जैसे प्रावधान किया जा सकता है। हेयरकट का सीधा मतलब है कि बैंकों को लोन वसूली में समझौता करना पड़ेगा। डिफॉल्टर जो कर्ज दे सकता है, बैंकों को उसे लेकर अपने लोन बुक को क्लीयर करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो उसका सीधा असर प्रॉफिट पर पड़ेगा।

वन टाइम सेटलमेंट का भी मिलेगा मौका

एनपीए पॉलिसी में इसके अलावा बैंकों को वनटाइम सेटलमेंट का भी ऑप्शन मिल सकता है। जिसमें बैंक डिफॉल्टर के साथ एक बार में कर्ज वसूलने का ऑप्शन मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार सरकार की कोशिश है कि एनपीए पॉलिसी के जरिए देश के जो टॉप-50 डिफॉल्टर से ज्यादा से ज्यादा कर्ज वसूला जा सके।

सीडीआर में पहुंचे 4.74 लाख करोड़ के मामले

सीडीआर सेल की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर 2016 तक कुल 655 केस पहुंच चुके हैं। जिन पर कुल 4.74 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। इसमें से 168 केस अभी लाइव हैं, जिन पर 2.07 लाख करोड़ रुपए का कुल कर्ज है।

Courtesy: Bhaskar

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