H-1B वीजा अप्लाई करने वालों से US मांग सकता है FB, twitter पासवर्ड

H-1B वीजा अप्लाई करने वालों से US मांग सकता है FB, twitter पासवर्ड

वॉशिंगटन/न्यूयार्क.    अमेरिकी वीजा के लिए अप्‍लाई करने वालों को अब और सख्‍त वीजा स्‍क्रूटनी से गुजरना पड़ सकता है। इसमें वीजा एप्लिकेंट्स को अपने फेसबुक, ट्वीटर जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के आईडी और पासवर्ड भी देना पड़ सकता है। अमेरिकी सरकार की ओर से पब्लिश डॉक्‍यूमेंट में यह जानकारी दी गई है। बता दें कि डोनाल्‍ड ट्रम्‍प पहले ही कह चुके हैं कि आतंकी हमलों को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाना जरूरी है। सवाल पूछना सख् स्क्रूटनी का हिस्सा

 

– न्‍यूज एजेंसी के मुताबिक यूएस डिपार्टमेंट की ओर से जारी डॉक्‍यूमेंट में कहा गया है कि अमेरिका वीजा एप्लिकेंट्स के कुछ एडवांस और एक्‍स्‍ट्रा स्‍क्रूटनी पर विचार कर रहा है। इसके लिए कुछ नॉर्म्‍स प्रपोज्ड किए गए हैं। सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर सवाल पूछना सख्‍त स्‍क्रूटनी का हिस्‍सा होगा।

– यूएस स्‍टेट डिपार्टमेंट के एस्टिमेट के मुताबिक हर साल दुनियाभर से 65 हजार लोग यूएस वीजा के लिए अप्‍लाई करते हैं। हालांकि डाक्‍यूमेंट में यह भी कहा गया है कि किसी खास देश के लोगों को इस पॉलिसी के तहत टारगेट नहीं किया जाएगा।

 

बायोग्राफिकल इन्फार्मेशन भी मांगी जा सकती है

– डॉक्‍यूमेंट के मुताबिक यूएस वीजा के लिए अप्‍लाई करने वाले एप्लिकेंट्स से ई-मेल एड्रेस और फोन नंबर के साथ-साथ 15 साल का बायोग्राफिकल इन्‍फार्मेशन भी मांगा जा सकता है। ट्रम्‍प द्वारा अप्‍वाइंट होम सिक्युरिटी मिनिस्टर जॉन केली के मुताबिक लोगों से पासवर्ड मांगना उन कुछ चीजों में से एक है, जिन पर अभी विचार हो रहा है। इनमें से कोई भी सुझाव ठोस रूप में नहीं है। यूएस स्‍टेट डिपार्टमेंट्स के इन प्रपोजल्‍स को मंजूरी मिल जाती है तो वीजा नॉर्म्‍स को सख्‍त करने की तरफ ट्रम्‍प सरकार का पहला ठोस कदम होगा।

 

टेम्पररी बैन वाले मुस्लिम देशों के मामले पर भी विचार

– डॉक्‍यूमेंट के मुताबिक मुसलमानों की बहुलता वाले 7 देशों के रिफ्यूजियों और वीजा एप्लिकेंट्स की जांच के मामले पर भी विचार किया जा सकता है। ट्रम्‍प सरकार ने सीरिया, इराक, ईरान, सोमालिया, सूडान, लीबिया और यमन के ज्यादातर रिफ्यूजियों और पैसेंजर्स की अमेरिका में एंट्री पर टेम्पररी तौर पर रोक लगा दी थी।

– यूएस प्रेसिडेंट ट्रम्‍प के इस एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर पर फेडरल कोर्ड ने रोक लगा दी है। मामला अभी कोर्ट में है।

 

ट्रम् ने साइन किए थे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर

– अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनॉल्‍ड ट्रम्‍प ने अप्रैल में H-1B वीजा रूल्स को सख्त बनाने के लिए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया था। उन्होंने कहा था, “अमेरिकियों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। कंपनियों को स्किल्ड लोगों को ज्यादा सैलरी देनी होगी।”

– ट्रम्‍प का कहना है कि लंबे समय से अमेरिकी इम्प्लॉइज वीजा प्रोसेस के गलत इस्तेमाल को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। ट्रम्प के मुताबिक, “मौजूदा वक्त में H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम के तहत दिया जाता है। ये गलत है। वीजा ज्यादा स्किल्ड और हाईएस्ट पेड एप्लिकेंट्स को दिया जाना चाहिए। कंपनियां किसी भी तरीके से अमेरिकन की जगह किसी और इम्प्लॉई को नहीं रख सकतीं। जो पहले हो रहा था, वो नहीं होगा। कंपनियों को फेयर प्रॉसेस अपनानी होगी।”

 

H-1Bपर ज्यादा सख् है अमेरिका

– अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए H-1B के रूल्स को सख्त बनाने की बात कही जाती रही है। आरोप है कि कई कंपनियां दूसरे देशों से कम सैलरी पर वर्कर अमेरिका लाती हैं। इससे अमेरिकियों को नौकरी मिलने के मौके कम हो जाते हैं और बेरोजगारी बढ़ती है। USCIS जनरल कैटेगरी में 65 हजार फॉरेन इम्प्लॉइज और हायर एजुकेशन (मास्टर्स डिग्री या उससे ज्यादा) के लिए 20 हजार स्टूडेंट्स को एच-1बी वीजा जारी करता है।

– H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी थ्योरिटिकल या टेक्निकल एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं। ट्रम्प अपने प्रेसिडेंशियल कैम्पेन के समय से ही H-1B वीजा सिस्टम में बदलाव की बात कहते रहे हैं। अमेरिकी रिपोर्ट्स बताती हैं कि हर साल ज्यादातर H-1B वीजा भारतीय आईटी कंपनियां हासिल कर लेती हैं।

 

Courtesy: Bhaskar
Categories: International