निरंकुशता और मनमानेपन की सीमाएं को पार कर रही है मोदी सरकार : मायावती

निरंकुशता और मनमानेपन की सीमाएं को पार कर रही है मोदी सरकार : मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल में बसपा के ज़िम्मेवार पदाधिकारियों के साथ आज यहाँ लम्बी बैठक की। इस बैठक में उन राज्यों में पार्टी के कार्यकलापों, संगठन की तैयारियों के साथ-साथ सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने सम्बन्धी गतिविधियों तथा वहां के राजनीतिक हालात के बारे में गहन विचार-विमर्श व समीक्षा की गई।

 

बैठक में इन राज्यों के पदाधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों के लोगों में भी काफी आशंकायें हैं और लोकतंत्र की सुरक्षा के प्रति काफी चिंताएं हैं जिनका समाधान आवश्यक है तथा लोगों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आ जाने से इस समस्या का कोई उचित व संतोषजनक समाधान निकले। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में अगले वर्ष ही विधानसभा का आमचुनाव होना है।

 

इस अवसर पर अपने संबोधन में मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व इनकी राज्य सरकारें राजनीतिक विद्वेष व संकीर्म जातिगत भावना के साथ काम करके विरोधी पार्टियों को लगातार अपना निशाना बना रही है और इस क्रम में सरकारी मशीनरी का खुले तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

 

उन्होने आगे कहा, मोदी सरकार व बीजेपी निरंकुशता व मनमानेपन की सीमा को पार करती जा रही है जिसके प्रति विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ आमजनता में भी चिन्तायें बढ़ती जा रही है। बीजेपी व इनकी सरकारों की जनहित व देशहित के मामले में कथनी व करनी में व्यापक अन्तर का भेद देश में नई-नई समस्याएं पैदा कर रहा है और इससे जनकल्याण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। समाज के गरीब, शोषित व पिछड़े वर्ग की तो सही मायने में सरकार ने सुध लेना ही छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों का सामना करने के लिये पूरे तन, मन, धन से काम करने की जरूरत है।

 
देश के गरीबों, मजदूरों, दलितों, पिछड़ों आदि के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा- अम्बेडकर का नाम वोट की राजनीति व स्वार्थ के कारण बीजेपी व उनके घोर विरोधी भी आजकल लेने लगे हैं परन्तु वास्तविकता यह है कि इनकी भारी जनसंख्या होने के बावजूद इनके अनुयाइयों, गरीबों, मज़दूरों, किसानों, दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग के करोड़ों लोगों को संवैधानिक व कानूनी संरक्षण प्राप्त होने के बावजूद आज भी पहले की तरह ही उन्हें सरकारी संरक्षण में विभिन्न प्रकार के शोषण, उपेक्षा, तिरस्कार तथा हर स्तर पर जुल्म-ज्यादती व अन्याय का शिकार बनाया जा रहा है।

 

इस समीक्षा बैठक में अन्य बातों के अलावा दक्षिण भारत के राज्यों के दलितों व अन्य उपेक्षित वर्गों में सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके अपना उसपर स्वयं करने के बाबा साहेब डा.भीमराव अम्बेडकर के आह्वान के प्रति और भी ज्यादा जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता महसूस की गई।

Courtesy: nationaldastak

Categories: Politics

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