उत्‍तर प्रदेश के सहारनपुर में कब लौटेगी शांति? 20 दिन के अंदर तीन बार हिंसा…

उत्‍तर प्रदेश के सहारनपुर में कब लौटेगी शांति? 20 दिन के अंदर तीन बार हिंसा…

नई दिल्लीकभी दलित और मुसलमानों के बीच झड़प तो कभी दलित और ठाकुरों के बीच संघर्ष, आख़िर सहारनपुर में बार-बार हिंसा क्यों हो रही है?

बीस तीन में तीसरी बार हिंसा के शिकार सहारनपुर में शांति क़ायम करने के लिए प्रशासन ने सभी पक्षों के साथ बैठक की. इसमें दलित और ठाकुरों के साथ-साथ तमाम राजनीतिक दलों ने भी हिस्सा लिया. पुलिस की तरफ़ से पहले जो नकारापन दिखाया गया, अब प्रशासन उसकी भरपाई की कोशिश कर रहा है.

सहारनपुर के डीएम एनपी सिंह का कहना है कि इंटेलिजेंस और पुलिस का आंकलन यह था कि इस महापंचायत को रोक देंगे और बाहर से ही लोगों को वापस कर देंगे तो छोटे-मोटे प्रतिरोध होंगे, लेकिन पुलिस पर संगठित रूप से कोई हमला
होगा ऐसी कोई आशंका नहीं थी.

सहारनपुर जल रहा है तो इसके पीछे पुलिस की नाकामी तो है ही, राजनीति भी गहरी है. निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए ये पूरा मामला दलित वोटबैंक को अपने साथ जोड़ने और दलितों और अगड़ों के बीच ख़ाई पैदा कर राजनीतिक रोटी सेंकने का भी है.

20 अप्रैल को सड़क दुधली में अंबेडकर जुलूस के बहाने दलितों और मुसलमान के बीच एक खाई पैदा करने की कोशिश की गई. मक़सद हिंदू कार्ड खेलने का था, ताकि दलितों को बीजेपी के साथ मज़बूती से जोड़ा जा सके. हालांकि उस जुलूस के हिस्सा रहे बीजेपी सांसद राघव लखनपाल इसे सही नहीं मानते.

सहारनपुर के बीजेपी सांसद राघव लखनपाल कहते हैं कि ऐसी घटनाएं क्‍यों हो जाती हैं और क्‍यों हो रही हैं… यह एक जांच का विषय है, जिसे देखा जाएगा, लेकिन यह घटनाएं आपस में जुड़ी हुई नहीं हैं. पिछली दो घटनाएं जरूर जुड़ी हुई हैं. अब इसमें शरारती तत्‍व कौन है, यह हमें देखना होगा.

5 मई को शब्बीरपुर गांव में दलितों ने पहले जिस तरह से ठाकुरों के ख़िलाफ़ उकसावे की कार्रवाई की, उसके पीछे स्थानीय बीएसपी प्रधान का हाथ बताया जाता है. पुलिस गंभीरता को नहीं समझ पाई, लिहाज़ा ठाकुरों की तरफ़ से आगज़नी की वारदात को वह रोक नहीं पाई.

नौ मई की हिंसा दलितों की तरफ़ से बदले की कार्रवाई है. उन्हें उकसाने के लिए बाहर से लोग आए. इसमें भीम सेना का हाथ बताया जा रहा है. मक़सद दलित और ठाकुरों के बीच खाई बढ़ाकर बीएसपी के वोटबैंक को मज़बूत करने की कोशिश है. हालांकि बीएसपी भीम सेना के साथ संबंध से इंकार कर रही है.

बीएसपी नेता क़ाज़ी रशीद मसूद का कहना है कि यह झगड़ा बीएसपी द्वारा कराया गया है, यह बात बिल्‍कुल गलत है. उनका आरोप है कि भीम सेना के लोगों ने इसे अंजाम दिया था और इस संगठन का बीएसपी से कोई लेना-देना नहीं है.

सहारनपुर में 10 साल से निकाय चुनाव नहीं हुए हैं. अब वे जल्द होने वाले हैं. इससे पहले बीएसपी उन दलितों को अपने साथ वापस जोड़ना चाहती है जो विधानसभा चुनाव में उससे छिटककर बीजेपी के पास चले गए. जबकि बीजेपी किसी भी क़ीमत पर दलितों को अपने से जोड़े रखने की कोशिश में है. इस रस्साकशी के बीच सहारनपुर में और हिंसा की आशंका बरक़रार है.

Courtesy: NDTV

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