सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कहां गए मजदूरों के कल्याण के बीस हजार करोड़

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कहां गए मजदूरों के कल्याण के बीस हजार करोड़

नई दिल्ली। निर्माण मजदूरों के कल्याण पर खर्च होने वाली बीस हजार करोड़ रुपये की विशाल धनराशि का ब्योरा नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। पूछा कि कहां गया यह पैसा?

कहीं यह धनराशि चाय पार्टी या अफसरों के सैर-सपाटे पर तो नहीं खर्च हो गई? उसने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से इस फंड का पता लगाकर न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया।

एनजीओ नेशनल कंपेन कमेटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने उपरोक्त आदेश दिया। अपनी याचिका में एनजीओ ने आरोप लगाया है कि निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए रियल एस्टेट फर्मों से वसूले गए वैधानिक उपकर का ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

याचिका में आगे कहा गया है कि इस फंड का दुरुपयोग इसलिए हो रहा है क्योंकि लाभार्थियों की पहचान और उन तक लाभ पहुंचाने के लिए कोई उपयुक्त तंत्र मौजूद नहीं है। इस पर कैग की ओर से दाखिल हलफनामे और रिपोर्ट को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्त की पीठ ने कहा, ‘कैग को भी पता नहीं कि पैसा कहां है। यह 20,000 करोड़ रुपये के करीब है।’ पीठ ने सवालिया अंदाज में कैग से पूछा, ‘यह पैसा कहां जा रहा है। क्या यह चाय पार्टी अथवा अधिकारियों के सैर-सपाटे पर खर्च हो गया? आपको (कैग) यह पता लगाना ही होगा।’

राज्यों ने कितनी राशि वसूली अदालत ने जांच के लिए रास्ता भी सुझाया। कहा कि पहले तो यह पता लगाया जाए कि 1996 से लागू बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस एक्ट के तहत इस वर्ष 31 मार्च तक प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने उपकर के रूप में कितनी राशि वसूल की।

साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि इस दौरान जुटाई गई धनराशि में से कितना पैसा कंस्ट्रक्शन वेलफेयर बोर्ड को दिया गया। कैग यह सारा हिसाब-किताब जुटाए।

अगर कहीं धनराशि का आवंटन अब तक नहीं किया गया है तो संबंधित बोर्ड को उक्त धनराशि छह हफ्ते में निर्गत कर दी जाए।

2015 में भी लगाई थी फटकार ध्यान रहे कि इससे पूर्व 2015 में भी सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण मजदूर कल्याण फंड के तकरीबन 26,000 करोड़ रुपये खर्च नहीं होने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई थी।

उसने हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से इस फंड का पूरा ब्योरा देने के लिए कहा था।

हरियाणा ने वसूले 1314.86 करोड़ लेकिन बोर्ड को दिए 52 करोड़ हरियाणा पर आरोप था कि उसने 1996 से 31 मार्च 2015 की अवधि में मजदूर कल्याण उपकर के रूप में 1314.86 करोड़ वसूले, लेकिन वेलफेयर बोर्ड को महज 52 करोड़ रुपये ही दिए। इस पर उस समय कोर्ट ने कहा था कि मजदूरों का पैसा अधिकारियों और विज्ञापन पर खर्च कर दिया गया।

Courtesy: Jagran

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