‘मैं भी खाता हूं बीफ, इसमें कुछ गलत नहीं’

‘मैं भी खाता हूं बीफ, इसमें कुछ गलत नहीं’

नई दिल्ली। बुचड़खानों के लिए पशुओं की खरीद-फरोख्त पर केंद्र सरकार के रोक लगाये जाने की अधिसूचना के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बीजेपी शासित कई राज्यों में भी इसे लेकर प्रदर्शन चल रहा है।

 

एक अंग्रेजी न्यूज को दिए इंटरव्यू में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता पेमा खांडू ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के बूचड़खानों के लिए पुश बिक्री पर रोक लगाने संबंधि नोटिफिकेशन का समर्थन नहीं करते हैं, खासकर ऐसे प्रदेशों में जहां बीफ खाने वाले लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को वध के लिए पशुओं की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने वाले नोटिफिकेशन पर फिर से विचार करना चाहिए। सीएम ने कहा कि वह खुद भी बीफ खाते हैं और ऐसा करने में कुछ भी गलत नहीं है।

 

बीजेपी शासित मेघायल में भी केंद्र सरकार के नए अधिसूचना तथा बीफ को लेकर बवाल मचा हुआ है। बीजेपी के स्थानीय नेता बर्नार्ड मरक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बनार्ड का प्रस्ताव था कि मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर मेघालय में बीफ पार्टी का आयोजन किया जाए। उनके इस प्रस्ताव को पार्टी के सीनियर नेताओं ने ठुकरा दिया, जिसके बाद बर्नार्ड ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

 

बर्नार्ड ने आगे कहा, ”उस पॉलिटिकल पार्टी का क्या मतलब है जो गारो परंपरा और संस्कृति को जिंदा नहीं रख सकते। बीजेपी के नेता लोग हमारे खान-पान को लेकर तानाशाही नहीं कर सकते।” इस्तीफा देने से पहले बर्नार्ड मरक ने कहा था, “मेघालय में कई बीजेपी नेता गोमांस खाते हैं। मेघालय जैसे शहर में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का सवाल ही नहीं उठता। मेघालय में बीजेपी नेताओं को पहाड़ी क्षेत्रों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक प्रावधानों के बारे में अच्छी तरह पता है।”

 

 

वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी सरकार के इस फैसले को खाने की आजादी और राज्यों के अधिकारों में दखल बताया था। इतना ही नहीं कुछ दिन पहले सरकार के फैसले के विरोध में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक तौर पर गोवंश का वध कर दिया। इसको लेकर देश में राजनीति में हचलच मच गई थी।

Courtesy: nationaldastak.

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