GST के लिए तैयार नहीं बैंक, संसद की कमेटी से कहा-इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा

GST के लिए तैयार नहीं बैंक, संसद की कमेटी से कहा-इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा

नई दिल्ली/मुंबई.जीएसटी लागू होने में एक महीने से भी कम वक्त बचा है, लेकिन बैंकिंग इंडस्ट्री अभी इसके लिए तैयार नहीं है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने फाइनेंस पर संसद की स्टैंडिंग कमेटी के सामने यह बात कही है। एसोसिएशन का कहना है कि जीएसटी के लिए बैंकों को अपने सिस्टम में कई बदलाव करने पड़ेंगे। कस्टमर्स को बैंकों की कई सर्विसेज सेंट्रलाइज्ड लेवल पर दी जाती हैं, तो कुछ ब्रांच लेवल पर। जीएसटी के लिए बैंकों को मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा और यह बहुत बड़ी चुनौती है।हर राज्य में रिटेल इंडस्ट्री पर फोकस बढ़ेगा

 

– इस बीच, केयर रेटिंग्स ने कहा है कि जीएसटी से ऑर्गनाइज्ड रिटेल को बराबर मौके मिलेंगे। मीडियम टर्म में अनऑर्गनाइज्ड रिटेल की तरफ से कॉम्पिटीशन कम होगा। सरकार ने कपड़ों के लिए टैक्स की दो कैटगरी 5% और 12% रखी हैं। जीएसटी कन्जम्पशन बेस्ड टैक्स है। इसलिए हर राज्य में रिटेल इंडस्ट्री पर फोकस बढ़ेगा। रिटेल दुकानदार की ऑपरेटिंग कॉस्ट में 10-15% हिस्सा किराए का होता है। इस पर सर्विस टैक्स भी लगता है, लेकिन इसका इनपुट क्रेडिट नहीं मिलता।

 

खेलकूद के सामान पर 12% टैक्स

– जीएसटी काउंसिल ने शनिवार की मीटिंग में कुछ बदलाव किए हैं। पहले एक्सरसाइज, जिमनास्टिक्स, एथलेटिक्स और टेबल टेनिस समेत अन्य स्पोर्ट्स और आउटडोर गेम्स की चीजों को 28% कैटगरी में रखा गया था। इसे बदल कर एक्सरसाइज, जिमनास्टिक्स और एथलेटिक्स की चीजों तक सीमित कर दिया गया है। स्पोर्ट्स गुड्स पर 12% टैक्स लागू होगा। इरेजर को 18% की जगह 12% की कैटगरी में रखा गया है। जरी में इस्तेमाल होने वाले ग्लास बीड्स को 18 की जगह 5% की कैटगरी में डाला गया है। पैकेज्ड और ब्रांडेड खाद पर 5% टैक्स लगेगा।

 

सिंथेटिक धागे पर 18% लेकिन कपड़े पर 12% टैक्स लगेगा

– जीएसटी काउंसिल ने पैकेज्ड फूड, टेक्सटाइल, ज्वैलरी पर टैक्स रेट तय किए, जो इस तरह हैं-

 

0% जीएसटी

– कच्चा सिल्क, खादी यार्न, नारियल रेशा, बिना स्पिनिंग वाला जूट।

पूजा सामग्रीरुद्राक्ष माला, तुलसी कंठी माला, पंचगव्य, यज्ञोपवीत, खडाउं, पंचामृत, विभूति, बिना ब्रांड का शहद, दीये की बाती, रोली, कलावा, चंदन टीका।

 

3% जीएसटी
– सोना, चांदी, प्लेटिनम, इनकी ज्वैलरी, सभी तरह के पर्ल, डायमंड, प्रेसियस और सेमी प्रेसियस स्टोन, सिंथेटिक स्टोन, नेचुरल या सिंथेटिक प्रेसियस/सेमी प्रेसियस स्टोन के पाउडर, इमिटेशन ज्वैलरी।

 

5% जीएसटी
पैकेज्ड और ब्रांडेड खाद्य पदार्थ: गेहूं, चावल, राई, जौ, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, आटा, मैदा, बेसन। सिल्क यार्न, सिल्क वुवेन फैब्रिक, वूलेन फैब्रिक, कॉटन, कॉटन यार्न, कॉटन फैब्रिक, सिंथेटिक फैब्रिक, एम्ब्रॉयडरी। 1,000 रु. तक केे कपड़े, कंबल, लाइनेन, पर्दे, नैपकिन, टॉवेल, टेबल कवर, कुशन कवर, लाइफ जैकेट। 500 रु. तक के फुटवियर।

पूजा सामग्री लोभान, मिश्री, बताशा, बूरा।

 

12% जीएसटी

– सोने-चांदी का जरी का धागा, इमिटेशन जरी का धागा, कारपेट एवं टेक्सटाइल फ्लोर कवरिंग, मैट, वुवेन पाइल फैब्रिक, टेरी टॉवल, वुवेन टेरी फैब्रिक, लेस या क्रोशिया किया नेट फैब्रिक, कपड़े के लेबल और बैज, सभी तरह के कोटेड फैब्रिक, टेक्सटाइल वाल कवरिंग।

– 1,000 रुपए से ज्यादा कीमत वाले कपड़े, कंबल, लाइनेन, पर्दे, नैपकिन, टॉवेल, टेबल कवर।
18% जीएसटी

– सभी तरह के बिस्किट, सिंथेटिक यार्न जैसे नाइलॉन, पॉलिएस्टर, एक्रिलिक, विस्कोस रेयॉन, सिंथेटिक धागे, तेंदू पत्ता (रिवर्स चार्ज)। 500 रुपए से ज्यादा के फुटवियर।

 

क्या है GST, कब से लागू होगा?
– GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स है। आसान शब्‍दों में कहें तो जीएसटी पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक जैसा बाजार बनाएगा।
– संसद इसका बिल पास कर चुकी है। 10 राज्य स्टेट जीएसटी पास कर चुके हैं। 1 जुलाई से GST देशभर में लागू होना तय है।

 

इसे क्यों लाया गया?
– 17 साल की कवायद के बाद GST इसलिए लाया गया कि अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। GST को केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जा रहा है।
– इससे एक्‍साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), स्टेट के सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैम्प ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या सेल्स और गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।

Courtesy: Bhaskar

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