गोल्ड जूलरी मेकिंग पर 18% GST लगा तो कस्टमर्स पर बढ़ेगा बोझ

गोल्ड जूलरी मेकिंग पर 18% GST लगा तो कस्टमर्स पर बढ़ेगा बोझ

मुंबई
गोल्ड ट्रेड से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। इसकी वजह है कि इस पर 3 फीसदी GST लगाया गया है, जबकि 5 पर्सेंट गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स लगाए जाने का अनुमान था। हालांकि, जूलरी मेकिंग चार्जेज पर GST की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण कस्टमर्स पर टोटल टैक्स इफेक्ट कहीं ज्यादा हो सकता है। गोल्ड ट्रेड से जुड़े लोगों को डर है कि 1 जुलाई से शुरू होने वाली जीएसटी व्यवस्था के तहत ज्यादातर दूसरी सर्विसेज की तरह मेकिंग चार्जेज पर भी 18 फीसदी जीएसटी लग सकता है। मौजूदा समय में जूलरी मेकिंग चार्जेज पर कोई टैक्स नहीं लगता है।

ऑल इंडिया जेम्स एंड जूलरी फेडरेशन (GJF) के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने बताया, ‘हम मेकिंग चार्जेज पर लगने वाले टैक्स को लेकर स्पष्टता चाहते हैं, जिसे स्थानीय कारीगर हमसे इकट्ठा करेंगे और सरकार के पास जमा कराएंगे।’ उन्होंने कहा कि अगर यह 18 फीसदी रहता है तो हमें इसे कस्टमर से रिकवर करना होगा।

केरल के फाइनैंस मिनिस्टर थॉमस आइजैक ने कहा कि शनिवार को हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में मेकिंग चार्जेज पर टैक्स को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, उनका मानना है कि यह 18 फीसदी नहीं होगा और पूरी वैल्यू चेन में कंपोजिट 3 फीसदी का टैक्स लागू होगा। खंडेलवाल को उम्मीद है कि उनकी यह चिंताएं 11 जून को होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में दूर होंगी।

कैलकुलेशन बताता है कि अगर मेकिंग चार्जेज पर 18 फीसदी GST लगाया गया तो कस्टमर को 3 फीसदी जीएसटी के ऊपर करीब 40 पर्सेंट देने होंगे। मान लीजिए कि कोई जूलर 100 रुपये मूल्य का गोल्ड खरीदता है। वह सप्लायर को जीएसटी के रूप में 3 रुपये (3%) का भुगतान करेगा। इस तरह उसकी कॉस्ट बढ़कर 103 रुपये हो जाएगी। जूलर यह गोल्ड किसी कारीगर को दे देता है। खंडेलवाल के मुताबिक कारीगर इस पर औसतन 7 फीसदी का मेकिंग चार्ज लेता है। 103 रुपये पर यह 7.2 रुपये बैठता है। अगर इस मेकिंग चार्ज पर 18 फीसदी का GST लगता है तो जूलर्स को कारीगर को 8.5 रुपये देने होंगे और इस तरह से उसकी टोटल कॉस्ट 111.5 रुपये हो जाएगी। कारीगर को दिए जाने वाले अतिरिक्त 1.3 रुपये 3 फीसदी जीएसटी का 43.3 फीसदी होगा। इस राशि को कस्टमर से वसूला जाएगा।

PC जूलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बलराम गर्ग का दावा है कि चूंकि, मार्केटिंग, रेंटल्स, मेकिंग चार्जेज जैसे सभी टैक्स पहले की व्यवस्था से अलग GST के तहत ‘इनपुट’ माने जाएंगे, ऐसे में मेकिंग चार्जेज पर 18 फीसदी GST लगने की स्थिति में भी कंज्यूमर पर कोई अतिरिक्त टैक्स इंपैक्ट नहीं होगा। इनपुट क्रेडिट का मतलब है कि अगर कोई जूलर अपने कस्टमर्स से कलेक्ट किए जाने वाले टैक्स की तुलना में कहीं ज्यादा टैक्स का भुगतान करता है तो उसे दिए गए टैक्स और कलेक्ट किए गए टैक्स के अंतर के बराबर क्रेडिट मिलता है। अगर कोई जूलर कलेक्ट किए गए टैक्स से कम कर का भुगतान करता है तो उसे सरकार के पास अतिरिक्त टैक्स जमा करना पड़ता है।

Courtesy: NBT
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