अर्थजगतदेश के सबसे बड़े बैंक ने खोली नोटबंदी की पोल, जारी रहेगा स्लोडाउन

अर्थजगतदेश के सबसे बड़े बैंक ने खोली नोटबंदी की पोल, जारी रहेगा स्लोडाउन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की शाम नोटबंदी का ऐलान कर सबको चौंका दिया था। इसके पीछे कालाधन नष्ट होना, जाली करेंसी पर रोक, आतंकवाद का खात्मा जैसे फायदे गिनाए गए थे। लोग महीनों तक लाइनों में लगे रहे, 100 से ज्यादा इसकी वजह से मर गए लेकिन अब सामने आ रहा है कि इस फैसले से कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया।

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने आशंका जाहिर की है कि देश की अर्थव्यवस्था को धीमा करने और कारोबार पर विपरीत प्रभाव डालने पर नोटबंदी का असर बना रह सकता है। सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर 500 और 2,000 रुपये के नए नोटों कों शुरू किया था।

बैंक ने कहा कि अभी इकॉनमी और बैंकिंग सेक्टर पर नोटबंदी के असर का आकलन नहीं किया जा सका है। निवेशकों के समक्ष रखे गए प्रिलिमिनरी प्लेस्ड डॉक्युमेंट्स में बैंक ने कहा कि नोटबंदी का असर अभी अनिश्चित है, लेकिन इससे बैंक के कारोबार पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है। बैंक ने कहा कि इसके चलते ऑपरेशंस और फाइनैंशल कंडिशन पर असर होगा।

बैंक ने कहा, ‘नोटबंदी के चलते इकॉनमी में मंदी का असर जारी रह सकता है और इससे बैंक का कारोबार भी प्रभावित होने की आशंका है।’ प्रिलिमिनरी प्लेस्ड डॉक्युमेंट्स में बैंक भविष्य में कारोबारी खतरों और अनिश्चितता के बारे में जानकारी देता है। हालांकि बैंक की फाइनैंशल परफॉर्मेंस इस भविष्यवाणी से अलग भी हो सकती है। नोटबंदी के बाद बैंकों के बचत और चालू खातों में जमा होने वाली राशि में बड़ा इजाफा हुआ है।

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों में जमा राशि 4.10 पर्सेंट के मुकाबले 17 फरवरी, 2017 तक बढ़कर 39.30 पर्सेंट तक पहुंच गई थी। इसके बाद बैंक ने डिपॉजिट्स की ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला लिया। एसबीआई ने कहा कि जमा की ब्याज दरों में कटौती के चलते कमर्शियल बैंकों और अन्य फाइनैंशल इंस्टिट्यूशंस से कड़ी चुनौती मिल सकती है।

Courtesy: National Dastak

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