मेघालय ने किया जानवरों की खरीद-बिक्री को बैन करने वाले नोटिफिकेशन का विरोध

मेघालय ने किया जानवरों की खरीद-बिक्री को बैन करने वाले नोटिफिकेशन का विरोध

शिलॉन्ग. मेघालय ने जानवरों की खरीद-फरोख्त पर बैन लगाने वाले केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन का विरोध किया है। ऐसा करने वाला वह केरल के बाद दूसरा राज्य है। मेघालय की सरकार ने नोटिफिकेशन के विरोध में विधानसभा में बाकायदा रेजोल्यूशन पास किया है। रेजोल्यूशन के मुताबिक, सरकार ने कहा है कि केंद्र का नोटिफिकेशन हम इसलिए नहीं मान सकते, क्योंकि राज्य के लोगों की अपनी फूड हैबिट है और इससे इकोनॉमी पर भी असर पड़ेगा। सभी विधायकों ने सरकार का सपोर्ट किया
– न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी विधायकों ने रेजोल्यूशन को लेकर चीफ मिनिस्टर मुकुल संगमा को सपोर्ट दिया।
– रेजोल्यूशन के मुताबिक, “पूरा हाउस (विधानसभा) केंद्र के जानवरों की खरीद-फरोख्त पर बैन के लिए बनाए गए रूल्स (प्रिवेंशन ऑफ क्रुअल्टी टू एनिमल्स रेग्युलेशन ऑफ लाइवस्टॉक मार्केट रूल्स 2017) का विरोध करता है।”
– “कॉन्स्टिट्यूशन के मुताबिक, हर राज्य का अपना एक कैरेक्टर होता है। राज्य की स्थिति के चलते हम ऐसे किसी कानून को नहीं मान सकते। इससे रोजमर्रा की जिंदगी पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही इकोनॉमी भी प्रभावित होगी।”
– रेजोल्यूशन को सदन में पेश में पेश करते वक्त संगमा ने आरोप लगाया कि केंद्र का नोटिफिकेशन इस तरह से बनाया गया है कि इससे नॉर्थ-ईस्ट, खासकर मेघालय के लोगों पर इसका असर पड़े।

बीफ हमारे जीवन का हिस्सा: संगमा
– संगमा ने ये भी कहा कि बीफ हमारे जीवन का हिस्सा होने के अलावा मेघालय की जनजातियों के रोज के खाने में शामिल होता है।
– “2015-16 में राज्य में बीफ की डिमांड 23 हजार 634 मीट्रिक टन थी। राज्य में केवल 12 हजार 834 मीट्रिक टन बीफ का प्रोडक्शन किया गया, जबकि 10 हजार 800 मीट्रिक टन बीफ बाहर से खरीदा गया।”

मारने के मकसद से जानवरों के खरीदनेबेचने पर केंद्र की रोक
– सरकार ने बूचड़खानों के लिए मवेशियों को खरीदने और बेचने पर नोटिफिकेशन जारी कर रोक लगा दी थी।
– 26 मई को केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने मोदी सरकार के फैसले के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि खरीदने और बेचने वालों को ये निश्चित करना होगा कि मवेशियों को मारा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि नए नियम का मकसद एनिमल मार्केट और मवेशियों की बिक्री को कंट्रोल करना है।

बैन लिस्ट से हट सकती हैं भैंसें, केंद्र दोबारा विचार करेगा
– केंद्र सरकार ने बूचड़खानों के लिए जिन मवेशियों को खरीदने और बेचने पर रोक लगाई है, उनमें से भैंसों को हटाया जा सकता है।
– एन्वायरन्मेंट मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी एएन झा ने कहा कि हमें बैन लिस्ट को लेकर कुछ सुझाव मिले हैं। इन पर विचार किया जा रहा है।
– बैन लिस्ट में गाय, बैल, भैंस, बछड़े और ऊंट को शामिल किया गया है।

क्या बोले थे केरल के सीएम?
– इसी मसले पर केरल के चीफ मिनिस्टर पिनराई विजयन ने कहा था, “ये सही नहीं है कि सरकार लोगों के खाने की चीजें भी तय कर रही है। इस फैसले के साथ सरकार उस सेक्टर को तबाह कर रही है, जो हजारों लोगों को रोजगार देता है। सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने से पहले राज्यों के साथ बैठकर इस पर सलाह करनी चाहिए थी।”
– केरल के अपोजिशन लीडर रमेश चेन्निथला ने कहा था, “मोदी सरकार शुरू से ही संवैधानिक अधिकारों को छीन रही है और ये बैन इस बात का ताजा उदाहरण है।”
– हैदराबाद में आल इंडिया जमीयत-उल-कुरेश के वाइस प्रेसिडेंट मो. सलीम ने कहा, “किसान अपने उन मवेशियों को बेचता है, जो उनके लिए काम के नहीं होते हैं। उस पैसे से वो दूसरे जानवर खरीदते हैं। गरीब आदमी मछली और मुर्गा नहीं खरीद सकता है। सरकार ये कानून लेकर आई तो हम इसको नहीं मानेंगे।”

कहां गोहत्या पर है बैन, कहां नहीं
– केरल, वेस्ट बंगाल, अरुणाचल, मिजोरम, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम में गोहत्या पर बैन नहीं है।
– राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में गोहत्या पर बैन है।

Courtesy: Bhaskar

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