रघुवर सरकार की पुलिस ने JNU में पढ़ने वाली दलित छात्रा और उसकी मां का किया उत्पीड़न

रघुवर सरकार की पुलिस ने JNU में पढ़ने वाली दलित छात्रा और उसकी मां का किया उत्पीड़न

खबर के अनुसार, झारखंड राज्य के पलामू जिला स्थित डाल्टनगंज के सदर थाना की पुलिस ने बर्बरता से दो दलित महिला को पीटा है। घटना 23 जून दोपहर लगभग डेढ़ बजे की है। पुलिस ने कांति देवी और उनकी बेटी तीजू भगत (छात्रा JNU) के साथ मारपीट की और उन्हें थाने में बंद कर दिया। कांतिदेवी ने अपनी बड़ी बेटी दिव्या भगत (जो जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं) को शाम सात बजे फ़ोन पर यह सूचना दी।

23 जून दोपहर एक बजे जब कान्तिदेवी तीजू से बातें कर रही थीं तो अचानक पुलिस आ धमकी। पुलिस के पास कोई वारंट नही था। वो कान्तिदेवी और तीजू भगत को जाति सूचक अपशब्द कहकर थाने चलने को कहने लगी। जब कान्तिदेवी ने इसका विरोध किया तो महिला कांस्टेबल ने उन्हें धमकाया और जोर जबरदस्ती करके थाने जाने को कहने लगी। मना करने पर पुलिस हाथापाई पर उतारू हो गयी और कान्तिदेवी को लाठी से पीटने लगी, जिसका तीजू भगत ने विरोध किया। उसके बाद पुलिस ने तीजू को भी निर्ममता से पीटा और घसीटते हुए पुलिस वैन तक ले गयी। निर्ममता से पीटे जाने से तीजू को काफी चोटें आईं।

दरअसल, विवाद जमीन से जुड़ा हुआ है। कन्तिदेवी अपने आंगन की चारदीवारी की मरम्मत कर रही थीं जिसका की इंदु भगत (तीजू भगत की चाची) और अन्य परिवार के लोगो ने विरोध किया। इंदु भगत के बार-बार अड़चन पैदा करने के कारण कान्तिदेवी बहुत तनाव में थीं।

 

करीब दो हफ्ते पहले तीजू ने इस घटना की सुचना SP और सर्किल ऑफिस को दी थी। उनके द्वारा आश्वासन मिलने के बाद ही कान्तिदेवी ने मरम्मत का काम दोबारा शुरू करवाया था। तीजू भगत ने करीब शाम साढ़े आठ बजे थाने से अपनी बड़ी बहन दिव्या भगत से बात की। उसने बताया की पुलिस ने उसपर और उसकी मां पर झूठा FIR किया है और थाने में बंद करके रखा है।

तीजू ने बताया की पुलिस ने थाने में भी उसके साथ मारपीट की है। अगले दिन 24 जून को पुलिस ने तीजू और उसकी मां को लेट से सीजीएम कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में तीजू ने बताया किस तरह से पुरुष पुलिस कर्मचारी (जो बिना यूनिफार्म के थे) ने उसका यौन उत्पीड़न किया एवं मारपीट की। तीजू ने यह भी बताया थाने में बंद करके भी उसके साथ मारपीट की गयी है।

छुट्टियां होने के कारण कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 28 जून की दी और पुलिस को कोर्ट में मामला लेट पेश करने के लिए सो कॉज नोटिस भी दिया। 25 जून को भाकपा माले ने विरोध सभा का आयोजन किया और पुलिस को तीजू भगत और उसकी मां को बिना शर्त रिहा करने की मांग की।

 

पुलिस की मानें तो तीजू भगत ने कांस्टेबल को अकेले मारा और उसका सिर फोड़ दिया। इस बीच बाकी कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। पर सवाल यह है की पुलिस बिना वारंट लिए किसके कहने पर कांतिदेवी के घर आ धमकी? क्या अकेले तीजू भगत पुलिस को मारती रही? झारखण्ड पुलिस महिला सशक्तिकरण का दंभ भारती है पर 23 तारीख की घटना पुलिस के महिला और दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब करती है।

Courtesy: nationaldastak

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