स्वरोजगार और पुनर्वास के नाम पर मोदी सरकार ने दलितों को ठग लिया

स्वरोजगार और पुनर्वास के नाम पर मोदी सरकार ने दलितों को ठग लिया

ई दिल्ली। केंद्र की भाजपा सरकार राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार घोषित कर प्राथमिकता के तौर पर दलितों के उत्थान का दावा कर रही है वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि दलितों के लिए बजटीय आवंटन के हिस्से में कटौती की गई है।

पिछले तीन सालों में सफाईकर्मियों के लिए स्वरोजगार के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई। साल 2013-14 में 557 करोड़ रुपये से इस साल सौ ज्यादा बार कटौती कर केवल 5 करोड़ रुपये हो गया है।
भारत सरकार के पूर्व सचिव पीएस कृष्णन कहते हैं, दलितों को आवंटित कुल बजट एनडीए का पहला बजट अनुपात में यूपीए के आखिरी बजट से कम है।

यूपीए के बजट में दलितों की योजनाओं का हिस्सा 2.49 प्रतिशत था लेकिन साल 2015-16 में 1.72 प्रतिशत और 2016-17 में 1.96 प्रतिशत रहा। चालू वित्त वर्ष में यह आवंटन 2.44 प्रतिशत है लेकिन आवंटन से व्य कम होने की उम्मीद है।

पिछले कई वर्षों से दलितों और आदिवासियों पर बजट खर्च का विश्लेषण कर रही बीना पालिकिकल ने कहा, केवल रकम में ही नहीं बल्कि दृष्टिकोण में भी बदलाव आया है।

भाजपा के दलित सांसद और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति के सदस्य उदित राज ने कहा, ‘मैं नियमित रुप से स्थायी समिती की बैठकों में ऐसे मुद्दों को उठा रहा हूं। अगर सरकार ने इस खर्च पर कटौती की है तो मैं इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाउंगा। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

 

कृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखे पत्र में कहा, जो बजट दलितों को आवंटित किया जा रहा है उनके (यूपीए) मुकाबले बहुत कम है। उन्होने लिखा, देश की आबादी में दलितों के अनुपात के हिसाब से यह स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत 16.6 प्रतिशत होना चाहिए।

कृष्णन ने कहा विशिष्ट योजनाओं और कार्यक्रमों में कटौती करने का मतलब समाज में गहरा भेदभाव करना है। इन योजनाओं में सफाई कर्मचारियों केलिए पुनर्वास और स्वरोजगार की योजना भी है।

Courtesy: nationaldastak.

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