पुण्यतिथि पर उठी मांग: बाबू जगजीवन राम को मिले भारत रत्न

पुण्यतिथि पर उठी मांग: बाबू जगजीवन राम को मिले भारत रत्न

नई दिल्ली। विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार और पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और दलितों के मसीहा बाबू जगजीवन राम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, रिपब्लिकन पार्टी के सांसद रामदास अठावले, उत्तरी दिल्ली नगर निगम की महापौर प्रीति अग्रवाल, पूर्व दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, हारुन यूसुफ सहित कई अन्य नेता मौजूद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के राजघाट स्थित समता स्थल पर पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 31वीं पुण्यतिथि पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और उनको श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। इस मौके पर बाबू जगजीवन राम को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की गई।

एक कार्यक्रम में बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन के सदस्य सूरज भान कटारिया ने कहा, बाबू जगजीवन का देश और समाज की भलाई में बहुत बड़ा योगदान है। खासकर दलितों के सशक्तिकरण में उन्होंने बहुत योगदान दिया है। हमारी मांग है कि उनको भारत रत्न दिया जाना चाहिए।

आपको बता दें बाबू जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रैल 1908 को ब्रिटिश भारत में बिहार राज्य के भोजपुर जिले के चांदवा में हुआ था। उनकी मृत्यु 6 जुलाई 1986 को हुई थी। बाबू जगजीवन राम भारत के प्रथम दलित उप-प्रधानमंत्री एवं राजनेता थे। बाबू जगजीवनराम ने देश में निर्भीकता के साथ छुआछूत जैसी कुरीतियों का विरोध कर समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े दलित समाज को उचित सम्मान दिलाने का काम किया था। वे गरीबों और दलितों के नेता थे।

बाबू जगजीवन राम का जन्म एक गरीब दलित परिवार में हुआ था। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और दलितों को सम्मान दिलाने के लिए जीवन भर काम किया। उन्होंने संविधान सभा के सदस्य के रूप में दलितों को कानून में उचित हक दिलाने की व्यवस्था की। उन्होंने दलित समाज को विकास की मुख्य धारा में शामिल करवाया।

बाबू जगजीवन राम ने भारत सरकार में सभी महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते हुए न्यूनतम मेहनताना, बोनस, बीमा, भविष्य निधि सहित कई क़ानून बनाये।  देश में डाकघर व रेलवे का जाल बिछा दिया। हरित क्रांति की नींव रखकर देश को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बनाया। विमान सेवा को देशहित में करने के लिए निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करके वायु सेना निगम, एयर इंडिया व इंडियन एअरलाइंस की स्थापना की।

रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने कहा था कि “युद्ध भारत के सूई की नोंक के बराबर भूभाग पर भी नहीं लड़ा जायेगा।” उन्होंने सन् 71 में बांग्लादेश के मुक्तिसंग्राम में ऐतिहासिक रोल निभाया था। उन्होंने जनवितरण प्रणाली की नींव रखी। 1936 से 1986 तक 50 वर्षों का उनका सार्वजनिक जीवन जनहित को समर्पित व बेदाग़ रहा।

Courtesy: nationaldastak

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