जेडीयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आज, बड़ा फैसला ले सकते हैं नीतीश

जेडीयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आज, बड़ा फैसला ले सकते हैं नीतीश

नई दिल्ली
क्या बिहार में लालू और नीतीश का महागठबंधन टूट जाएगा? क्या तेजस्वी यादव के डेप्युटी सीएम बने रहने के आरजेडी के फैसले को सीएम नीतीश मानेंगे या फिर सरकार बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा? मंगलवार को होने वाली जेडीयू प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में इन सभी सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि लालू परिवार पर पड़े छापों को लेकर चुप्पी साधे नीतीश इस बैठक में अपनी खामोशी खत्म कर सकते हैं। हालांकि शरद यादव ने सोमवार को इन छापों के पीछे बीजेपी का हाथ बताया था, पर जेडीयू नेता यह भी कह रहे हैं कि पार्टी अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी, जो इस बात का संकेत है कि नीतीश कोई कड़ा फैसला ले सकते हैं।

सोमवार को पटना में आरजेडी विधायकों की बैठक के बाद पार्टी की ओर से साफ तौर पर यह कहा गया था कि तेजस्वी अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। ऐसे में अब गेंद नीतीश के पाले में है। बीजेपी लगातार तेजस्वी को मंत्रिमंडल से हटाने के लिए नीतीश पर दबाव बना रही है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘जेडीयू अपने सिद्धांतों और जनता के बीच बनाई अपनी छवि से कोई समझौता नहीं करेगी। वित्तीय ईमानदारी से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री की राय जगजाहिर है। वह हमेशा से सरकार में पारदर्शिता और जवाबदेही के पक्षधर रहे हैं।’

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी मंगलवार विपक्ष के नेताओं की मीटिंग बुलाई है। माना जा रहा है कि आरजेडी और जेडीयू के बीच ‘टकराव’ की छाया इस मीटिंग पर भी देखने को मिल सकती है। हालांकि जेडीयू का कोई न कोई नुमाइंदा बैठक में शामिल होगा, लेकिन लालू के खिलाफ सीबीआई का केस और बेनामी संपत्ति मामले में उनकी बेटी-दामाद पर हुई कार्रवाई के चलते विपक्षी एकता को फिर झटका लग सकता है। नीतीश राष्ट्रपति चुनाव में पहले ही विपक्ष से अलग राह पकड़ चुके हैं।

हालांकि आरजेडी नेता लालू और नीतीश के बीच ‘तनातनी’ को खारिज करते हैं। उन्होंने तो सोमवार को यह भी कहा था कि दोनों के बीच फोन पर बात भी हुई है। लेकिन जेडीयू नेताओं को लगता है कि अगर तेजस्वी ने पद नहीं छोड़ा तो फिर बीच का रास्ता निकालना काफी मुश्किल हो जाएगा। जेडीयू के सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी को मंत्रिमंडल बनाए रखना नीतीश के लिए काफी मुश्किल होगा। नीतीश इसके पहले मुख्यमंत्री रहते हुए ऐसे तीन नेताओं को अपने मंत्रिमंडल से हटा चुके हैं जिनके खिलाफ मामले दर्ज हुए थे। जीतनराम मांझी, रामाधार सिंह और आरएन सिंह को नीतीश ने मंत्री पद से हटा दिया था। अब मांझी ने नीतीश पर यह कहते हुए हमला किया है कि उन्हें दलित होने की वजह से हटाया गया था, लेकिन नीतीश के पास लालू के बेटों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं है।

एक सीनियर जेडीयू नेता ने कहा, ‘आरजेडी के लिए संदेश साफ है कि अगर भष्टाचार के आरोपी मंत्रिमंडल में रहेंगे तो नीतीश जी सरकार नहीं चला पाएंगे।’ जेडीयू खेमा इस बात से भी नाखुश है कि लालू का परिवार प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उठाए गए सवालों पर जवाब नहीं दे पा रहा है। एक जेडीयू नेता ने कहा, ‘लालू और उनके परिवार को इन आरोपों का जवाब कानूनी और तकनीकी रूप से देना चाहिए था। लेकिन अभी तक सिर्फ राजनीतिक बातें की जा रही हैं। कानूनी दस्तावेजों के सहारे अभी तक कोई जबाव नहीं दिया गया है।’

जेडीयू के सूत्रों ने कबा कि आरजेडी के सामने यह विकल्प है कि वह जांच पूरी होने तक तेजस्वी को मंत्रिमंडल से हटा दे और तब तक के लिए अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे किसी बड़े नेता को मंत्रिमंडल में प्रमोट कर दिया जाए।

Courtesy: NBT

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