इंसान मारने पर 2 साल और गाय को मारने पर 14 साल की सजा

इंसान मारने पर 2 साल और गाय को मारने पर 14 साल की सजा

नई दिल्ली। इसमें चौंकने जैसा कुछ नहीं है अगर कहा जाए कि हम उस देश के वासी हैं जहां इंसान की जान की कीमत गाय से कम है! आश्चर्य इसलिए नहीं होना चाहिए क्योंकि हम आए दिन सड़क पर गाय के नाम पर होने वाले खूनी संधर्ष देखते रहते हैं। अखलाक, पहलू खान आदी की मौत इस बात के प्रबल उदाहरण भी हैं।

मुख्य बातेंः-

  1. कानूनन इंसान मारने पर 2 साल और गाय को मारने पर 14 साल की है सजा
  2. साकेत कोर्ट ने 2008 के उत्सव भसीन केस में सुनाया फैसला
  3. कोर्ट ने भसीन को दी दो साल की सजा
  4. पीड़ित परिवार को बतौर जुर्माना 10 लाख रुपए देने का आदेश

अब अगर फिर भी आपको इस बात पर यकीन नहीं है तो दिल्ली के साकेत कोर्ट की एक टिप्पणी जान लीजिए, जिसमें बकायदा यह कहा गया कि ‘गाय के हत्यारों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है, बनिस्बत लापरवाह ड्राइवरों के।’

 

दरअसल कोर्ट ने शनिवार को 2008 में हुए सड़क दुर्घटना पर फैसला सुनाते हुए हरियाणा के उत्सव भसीन को सिर्फ दो साल की दी। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऐसे मामलों में सजा को बढ़ाने के लिए एक गजब का तुलनात्मक उदाहरण दिया। कोर्ट ने कहा कि लापरवाह ड्राइवरों को अधिकतम दो साल की सजा होती है, जबकि गोहत्या करने वालों को पांच से 14 साल तक की सजा होती है।

जनसत्ता के मुताबिक, जज संजीव कुमार ने बताया कि गायों को मारने के लिए सजा 5, 7 और 14 साल की है। मगर तेज वाहन चलाने और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण होने वाली मौतों को लेकर कानून में सिर्फ दो साल की सजा का प्रावधान है।

गौरतलब है कि 11 सितंबर, 2008 को हरियाणा के एक बड़े उद्योगपति के बेटे उत्सव भसीन ने दिल्ली के मूलचंद फ्लाईओवर के पास अपनी BMW कार से बाइक सवार दो युवकों मृग्यांक श्रीवास्तव व अनुज चौहान को पीछे से टक्कर मार दी थी। अनुज ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था जबकि मृग्यांक को पैर में गंभीर चोट आई थी। शनिवार को साकेत कोर्ट ने उत्सव भसीन को दो साल की कैद की सजा और पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये और घायल को दो लाख रूपये बतौर जुर्माना देने का आदेश दिया।

Courtesy: nationaldastak.

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