गुजरात में 1 रुपए किलो बिक रहा आलू, किसानों का बीजेपी सरकार के खिलाफ हल्ला-बोल

गुजरात में 1 रुपए किलो बिक रहा आलू, किसानों का बीजेपी सरकार के खिलाफ हल्ला-बोल

नई दिल्ली। मोदी के गुजरात में किसान बदहाल स्थिति में हैं। यहां आलू की खेती करने वाले किसान इतने परेशान हैं कि उन्हें इसकी कीमत 1 रुपए किलो भी नहीं मिल रही है। इसके चलते उनको घर का रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कर्ज लेकर किसानों ने खेती की थी। अब कीमत न मिलने पर बेहद परेशान हैं। किसानों ने उत्पादन के बाद आलू को कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया था जिससे भविष्य में कीमत मिले। लेकिन उसका उलटा हो गया। अब वे 1 रूपए किलो से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में उन पर कर्ज का बोझ बढ़ गया। किसानों का कहना है कि सरकार अगर इसके निर्यात के लिए कुछ करती तो कीमत बेहतर मिलती। किसानों का कहना है कि कीमत इतने कम मिल रहे हैं कि कोल्ड स्टोरेज वालों को पैसा नहीं दे पा रहे हैं।

मुख्य बातेंः-

  1. किसानों को एक किलो आलू किमत एक रुपए भी नहीं मिल पा रही है
  2. गुजरात के किसानों पर बढ़ता जा रहा है कर्ज का भार
  3. आलू की पैदावार अच्छी हुई है लेकिन किसानों को फसल की कीमत नहीं मिल पा रही है
  4. कोल्ड स्टोरेज मालिकों पर मंडरा रहे है संकट के बादल

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक आलू के दाम इतने कम कि लागत तक नहीं निकल रही है। इसके चलते आलू किसान मुसीबत में हैं। सरकार का सब्सिडी का वादा अबतक पूरा नहीं हुआ। गुजरात का बनासकांठा का डीसा तहसील आलू की पैदावार के लिए मशहूर है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां के आलू किसानों को आंदोलन करना पड़ रहा है। इसकी वजह है आलू की कीमतों में भारी कमी। कसनाभाई ने मीडिया को बताया कि इस साल उन्हें 900 बोरे आलू की पैदावार हुई। एक बोरे में करीब पचास किलो आलू रखा जाता है। फरवरी-मार्च महीने में उन्होंने 3-4 रुपए के दर से चार सौ बोरे आलू बेच दिए।

 

इस कमीत में आलू के उत्पादन की लागत तक नहीं निकल रही थी। कीमत ज्यादा नहीं मिली जिसके चलते कसनाभाई ने बचे 500 बोरे कोल्ड स्टोरेज में डाल दिए। अब स्थिति यह है कि आलू की कीमत और कम हो गई जिससे वे काफी परेशान हैं। कसनाभाई की ही तरह दूसरे किसान भी आलू की उचित कीमत न मिलने से परेशान हैं। आजकल आलू की कीमत 1 रुपए मुश्किल से ही मिल रही है। इससे आलू की पैदावार करने वाले किसान काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इन किसानों की हालत इतनी बुरी है कि वे रोजमर्रे का खर्च मुश्किल से ही निकाल पाते हैं। उनका कहना है कि ऐसे में बच्चों की परवरिश करना कठिन हो गया है।

Courtesy: nationaldastak

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