बाबासाहेब की अनदेखी कर राष्ट्रपति कोविंद ने उजागर की अंबेडकर विरोधी मानसिकता- मायावती

बाबासाहेब की अनदेखी कर राष्ट्रपति कोविंद ने उजागर की अंबेडकर विरोधी मानसिकता- मायावती

नई दिल्ली। बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि के. आर. नारायणन के बाद देश के दूसरे दलित समाज के राष्ट्रपति बनने वाले श्री रामनाथ कोविंद को हार्दिक बधाई व शुभकामनायें हैं। इसके साथ ही मायावती ने कहा कि अच्छा होता अगर वे आज अपने शपथ ग्रहण के दिन राजघाट जाकर गाँधीजी को फूल अर्पित करने के साथ-साथ संसद परिसर में लगी भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर भी अपने श्रद्धा के कुछ फूल अर्पित कर देते, जिनकी वजह से ही आज वे देश के राष्ट्रपति बन पाये हैं।

मुख्य बातें-

  1. दूसरे दलित राष्ट्रपति बने हैं रामनाथ कोविंद
  2. भाजपा ने खेला था दलित उम्मीदवार का दांव
  3. संघ से जुड़े रहे हैं रामनाथ कोविंद
  4. बाबा साहब की अनदेखी पर बरसीं मायावती

मायावती ने कहा कि संसद परिसर में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा या फिर सेन्ट्रल हॉल में लगे इनके फोटो-चित्र पर भी, उन्हें पुष्प अर्पित नहीं करना एक ऐसा संकेत है, जो बीजेपी व इनके एनडीए एण्ड कम्पनी की अम्बेडकर-विरोधी सोच व मानसिकता को प्रदर्शित करता है, जिस पर देश के दलितों की खास नजर है।

मायावती ने कहा कि वैसे तो श्री रामनाथ कोविंद अपने राजनैतिक जीवनकाल में बीजेपी व आरएसएस की संकीर्ण व जातिवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं परन्तु सरकार में आने के बाद गाँधीजी व बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का नाम लेते रहने की अब यह आम परम्परा बन चुकी है और आज यह काम श्री रामनाथ कोविंद ने भी किया।

परन्तु श्री रामनाथ कोविंद से यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वे गाँधीजी के साथ-साथ बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भी अपने श्रद्धा के फूल नहीं चढ़ायेंगे। उन्हें आज बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को भी अपने श्रद्धा के फूल जरूर अर्पित करने चाहिये थे और अन्य किसी से तो नहीं किन्तु दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति से तो यह उम्मीद की ही जा सकती है कि वह बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के जीवन संघर्ष व उनके बलिदानों के प्रति हमेशा ही कृतज्ञ रहेगा।

इसके साथ ही, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिये कि वे आज अगर राष्ट्रपति के पद पर आसीन हो पायें हैं, तो उसकी सबसे बड़ी देन परमपूज्य बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर की है और फिर उनके बाद, इनकी मूवमेन्ट को आगे गति देने वाले मान्यवर कांशीराम व बीएसपी की है, जिसने बीजेपी को दलित समाज के व्यक्ति को देश का राष्ट्रपति बनाने के लिये मजबूर कर दिया है।

इसके अलावा मायावती ने देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गुजरात के साथ-साथ देश के अन्य कई और राज्य काफी बुरी तरह से बाढ़ से प्रभावित हैं। ऐसी स्थिति में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केवल गुजरात का ही नहीं बल्कि अन्य और बाढ़-पीड़ित राज्यों का भी पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिये। क्योंकि अब वे गुजरात के मुख्यमन्त्री नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के प्रधानमन्त्री हैं।

इसके साथ ही बाढ़-पीड़ित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद भी की जानी चाहिये। बल्कि इस मामले में कोई भी पक्षपात नहीं होना चाहिये, अर्थात गैर-बीजेपी शासित राज्यों की भी केन्द्र सरकार को बिना पक्षपात के हर स्तर पर, पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये।

Courtesy: .nationaldastak

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