खबर डिलीट करने पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने पूछा- क्या मीडिया को कंट्रोल कर रहे अमित शाह?

खबर डिलीट करने पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने पूछा- क्या मीडिया को कंट्रोल कर रहे अमित शाह?

नई दिल्ली। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात से राज्यसभा जा रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया है। राज्यसभा का पर्चा भरते समय अमित शाह ने अपने शपथ-पत्र मं अपनी संपत्ति का विवरण दिया है। आंकड़ों के अनुसार जहां 2012 में उनकी चल संपत्ति 1.90 करोड़ रुपए की थी जो अब यह बढ़कर 19 करोड़ हो गई है। उन्हें 10.38 करोड़ रुपए की चल संपत्ति पैतिृक तौर पर भी मिली है। पिछले 5 साल में शाह और उनकी पत्नी की चल और अचल संपत्ति में कुल 300 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2012 में उनकी कुल संपत्ति 8.54 करोड़ रुपए थी, वह बढ़कर 2017 में 34.31 करोड़ रुपए हो गई है।

मुख्य बातें-

  1. अमित शाह की संपत्ति में तीन सौ फीसदी की बढ़ोत्तरी वाली खबर न्यूज वेबसाइट्स ने हटाई
  2. वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने अमित शाह और मीडिया घरानों पर साधा निशाना
  3. टाइम्स ग्रुप और आउटलुक पब्लिकेशन जैसे संस्थानों की वेबसाइट्स ने हटाई खबर

 

वहीं देश के नामी-गिरामी कुछ मीडिया संस्थानों ने बीजेपी अमित शाह की यह खबर अपनी साइट से डिलीट कर दी है। हालांकि इस बात का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन वजहों से ये खबर वेबसाइटों से डिलीट की गई है। मुख्यधारा का मीडिया कहे जाने वाले टाइम्स ग्रुप और आउटलुक पब्लिकेशन जैसे संस्थानों ने इस खबर को प्रकाशित किया था। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर इसे हटा लिया गया। वहीं इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर भी सवाल उठने लगे हैं कि कहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मीडिया को नियंत्रित तो नहीं कर रहे हैं?

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार, बहुजन विचारक और मीडिया का अंडरवर्ल्ड, चौथा खंभा प्राइवेट लिमिटेड, दलाल स्ट्रीट: कॉरपोरेट मीडिया जैसी पुस्तकों के लेखक दिलीप मंडल ने भी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर सिलसिलेवार कई पोस्ट किए हैं। एक पोस्ट में उन्होने लिखा, ‘मीडिया में जो साहसी थे उन्होंने अमित शाह की काली कमाई की ख़बर लगाई और डाँट पड़ते ही हटा ली। जो डरपोक थे, या आरएसएस और अमित शाह के चमचे थे, उन्होंने लगाई ही नहीं।”

मंडल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘अमित शाह का लाख-लाख शुक्रिया कि उनकी काली कमाई की ख़बर लिखने वाले टाइम्स के दोनों पत्रकार ज़िंदा है। नौकरी तो जाएगी ही। लेकिन लगता है कि जान बख़्श दी साहेब ने। चैनल वाले ज़्यादा सावधान रहते हैं। किसी भी चैनल ने एक शब्द नहीं बोला।’

इंडिया टुडे समूह के पूर्व मैनेजिंग एडिटर दिलीप मंडल ने लिखा, ‘अमित शाह के अपने ही एफिडेविट में दर्ज काली कमाई से उनका चेहरा दाग़दार नज़र आ रहा था। मीडिया को साहब की चिंता हुई। मीडिया ने उनकी धोती खोलकर उस धोती से उनका दाग़दार चेहरा ढक दिया। अमित शाह को समझ में आया तब तक मीडिया स्वामीभक्ति के चक्कर में उनके साथ कांड कर चुका था। अमित शाह का एफिडेविट भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे चर्चित एफिडेविट बन चुका है। सोशल मीडिया के युग में छिपाना कितना ख़तरनाक हो सकता है, उसे समझने के लिए यह बेहतरीन केस स्टडी है।’

Courtesy: nationaldastak.

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