मैं मुंबई में हीरो बनने नहीं, ऐक्टिंग करने आया था: शाहरुख खान

मैं मुंबई में हीरो बनने नहीं, ऐक्टिंग करने आया था: शाहरुख खान

वाराणसी (जागरण संवाददाता)। किंग खान के नाम से शाहरुख खान को पूरी दुनिया जानती है, सोमवार को वह काशी में अपनी आने वाली फिल्म के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से अपने मन की बातें साझा की।

रोमांस के किंग यानि शाहरुख खान ने युवाओं को सोशल मीडिया पर देश विरोधी बातों से बचने की सलाह दी है। शाहरुख खान का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी बहुत स्मार्ट है और काफी तेज हैं। युवाओं को अपनी क्षमता, क्रियेटिविटी का सही दिशा में इस्तेमाल करना चाहिए।

देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के विकास कार्यों में युवाओं की भागीदारी होनी चाहिए। युवा पीढ़ी के लिए पढ़ाई-लिखाई बहुत जरूरी है। मेक इन इंडिया सरकार की बहुत अच्छी पहल है। तकनीकी रूप से दक्ष हो रहे इंडियन सिनेमा के विकास में मेक इन इंडिया का बहुत अहम योगदान होगा।

सवाल: पहली बार बनारस आए हैं, कैसा लगा बनारस
जवाब: बनारस तो पहली नजर में भा गया। यहां के लोगों का प्यार और दुलार देखकर सोच रहा हूं कि पहले क्यों नहीं आया बनारस। अब देखिएगा मेरा बनारस आना-जाना लगा रहेगा। अगर बनारस को लेकर मेरे पास कोई कहानी, किरदार आई तो जरूर करूंगा।

सवाल: भाई-बहन का पर्व राखी नजदीक है, इससे जुड़ी कोई खास बात।
जवाब: मैं तो दिल्ली का छोरा हूं, वहां तो कॉलोनी में राखी पर जिसकी कलाई पर सबसे बड़ी वाली राखी बंधती थी, वो पूरे मोहल्ले का हीरो होता था। मेरी बहन आज भी हर साल ब्रांदा से एक शर्ट और चार राखिंया खरीदकर भेजती है। चार राखियां इसलिए कि जो मुझे पसंद हो, अपनी कलाई पर बांध सकूं।

सवाल: सिनेमा जगत में कैसे बदलाव आए और हिंदी सिनेमा को किस ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं।
जवाब: मैं 25 साल से काम कर रहे हूं और इम्तियाज जैसे निर्देशक व अन्य कुछ कम सालों से फिल्मी दुनिया में काम कर रहे हैं। मेरा लंबा सफर है। शुरूआत में सब अपना ख्याल रखते हैं। एक समय सबकी जिंदगी में ऐसा आता है जब सभी सोचते हैं कि फिल्म अच्छी हो। फिल्म अच्छी और तकनीकी रूप से मजबूत होना चाहिए। रा-वन, अशोका, पहेली सब तकनीक से मजबूत थे। एक बार लंदन गया था। वहां एक हिंदी फिल्म देख रहा था, सिनेमा हाल में मौजूद कुछ अंग्रेजों ने साउंड को लेकर कमेंट किए। मुझे बहुत बुरा लगा। हमारी अपनी प्रथा है, फिल्मों में गाने होते हैं लेकिन हम तकनीकी रूप से तो मजबूत हो ही सकते हैं। मैंने रा-वन को लेकर 200 थियेटर पर साउंड को लेकर अपने पैसे खर्च किए थे।

सवाल: बाहुबली की ग्रैंड सफलता से क्या बालीवुड पर दबाव है।
जवाब: देखिए, पहले तो भारत की फिल्मों को बालीवुड, टालीवुड में मत बांटिए, यह इंडियन सिनेमा है। रजनीकांत की फिल्में भी दो से तीन सौ करोड़ कमा लेती है। यह अलग बात है कि हिंदी भाषा की फिल्मों को लेकर अधिक क्रेज है। यकीनन बाहुबली शानदार फिल्म थी और उसने बताया कि फिल्म अच्छे से प्रस्तुत की जाए तो दर्शक उसे प्यार देंगे।

सवाल: कहते हैं कि शाहरुख खान को जिस फिल्म की शूटिंग के दौरान चोट लगती है वो सुपरहिट हो जाती है।
जवाब: (हंसते हुए) यार, जो फिल्में चलनी होंगी, चलेंगी। वैसे इस फिल्म में तो मैने जानबूझकर कई बार खुद को चोटिल कर लिया था।

सवाल: डीडीएलजे के राज और जेएचएमएस के हैरी के प्यार में क्या अंतर आया।
जवाब: प्यार में कोई चेंज नहीं, प्रेम की कोई भावना नहीं बदली। यश जी से लेकर इम्तियाज के साथ काम किया। सभी में प्यार की भावना होती है। बस, भाषा बदल जाती है। मेरी बेटी को इम्तियाज की फिल्में अच्छी लगती हैं। कह सकते हैं प्यार के प्लेटफार्म बदल जाते हैं, पहले ट्रेन पकड़ने के दौरान प्यार हो जाता था। अब तो फेसबुक और ट्विटर पर भी प्यार हो जाता है।

सवाल: क्या बेटी सुहाना और बेटा आर्यन भी रूपहले पर्दे पर आएंगे
जवाब : देखिए, पहले उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करनी है। हीरो का बेटा हीरो ही बने यह जरूरी नहीं है। वो उनकी इच्छा पर निर्भर है।

सवाल: 25 साल बीत गए, शाहरुख की ऐक्टिंग में क्या बदलाव आया?
जवाब: ऐक्टिंग को लेकर जब शुरूआत की तब से लेकर अब तक क्या बदलाव आया। मैने राजू बन गया जेंटलमैन देखी थी, तब मैने बैग उठाया, अजीम के बेटे ने रोका था मैं तो जा रहा था। मेरे निर्देशकों को यकीन था, मैं वो करूं जो बेहतर हैं, उससे अच्छा निर्देशक जो कराए वो सही है।

सवाल: शाहरुख खान का कोई ड्रीम कैरेक्टर जिसे वह रुपहले पर्दे पर जीवंत करना चाहते हैं?

जवाब: अब मैं ड्रीम कैरेक्टर के कंफर्ट जोन से बाहर निकल चुका हूं। मैं सिर्फ थोड़ी अलग टाइप की कमर्शियल फिल्म करना चाहता हूं।

सवाल: रोमांटिक हीरो से लेकर विलेन तक के किरदार को लेकर आप पसंद किए जाते हैं, कैसा महसूस करते हैं?
जवाब: मैं इतने सालों से काम कर रहा हूं, अब लोगों को लगता होगा कि जो करेगा अच्छा करेगा। निगेटिव रोल किए थे तो लोगों को समझ में आया होगा कि ये भी एक किरदार है लेकिन अलग किस्म का। लोग समझते हैं कि हीरो को गालीगलौज नहीं करनी चाहिए लेकिन आप देखिए कि फिल्म अच्छी हो तो चलेगी।

 

सवाल: निगेटिव किरदार के दौरान डर नहीं लगा कि करियर खत्म हो जाएगा?
जवाब: मुझे उस समय समझ नहीं थी कि हीरो कैसे बनते हैं। मैं हीरो बनने नहीं आया था। जैसे निर्देशक कहते मैं अपना बेस्ट देने की कोशिश करता था। अब मुझे सब मालूम हैं। मेरे बेटे को हीरो अगर बनाना होगा तो उसे डांस सिखाऊंगा, एक्टिंग की क्लास भी कराऊंगा। मैं हीरो बनने नहीं आया था। बाजीगर की शूटिंग के दौरान यश चोपड़ा अपने एक मित्र से कह रहे थे कि इस लड़के को मना किया लेकिन इसने अपना करियर दांव पर लगा दिया, मैने बहुत समझाया पर नहीं माना। यश जी को कोई बोल नहीं सकता था, बहुत सारी चीजें ऐसी थी जिसने मुझे ऐसे रोल के लिए प्रेरित किया। यश चोपड़ा कहते थे कि शाहरुख लव स्टोरी नहीं करेगा तो लीजेंड नहीं बनेगा।

 

Courtesy: Jagran.com

Categories: Entertainment

Related Articles