सड़कों पर काले झंडे लेकर उतरा जनसमूह, ‘बीजेपी-अमित शाह मुर्दाबाद’ के नारे लगे

सड़कों पर काले झंडे लेकर उतरा जनसमूह, ‘बीजेपी-अमित शाह मुर्दाबाद’ के नारे लगे

रोहतक। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। अब उनके खिलाफ एक बड़ा जनसमूह काले झंडे लेकर सड़कों पर उतरा हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ और ‘रोहतक प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। इसका एक ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि यह रोहतक का है।

मुख्य बातें-

  1. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ रोहतक की सड़कों पर प्रदर्शन
  2. सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर वायरल हुआ वीडियो
  3. हाल ही में अमित शाह की रैली के लिए कई निजी स्कूलों में कर दी गई थी छुट्टी

 

वीडियो में लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से नोंक-झोंक भी हो रही है। यह वीडियो सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर मिशन एकता मंच की अध्यक्ष कांता आलडिया ने पोस्ट किया है।

कांता आलडिया ने कहा कि भाजपा ने दलित विरोधी रवैया अपनाया हुआ है जिससे समाज में भारी रोष है। उनहोने कहा कि पुलिस अधीक्षक पंकज नैन ने पानीपत में 25 जनवरी 2011 को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निर्दोष महिलाओं व पुरूषों पर लाठीचार्ज कर झूठी धाराएं लगाकर जेलों में डलवाया था। आलडिया ने कहा कि आज तक गरीबों को किसी योजना का लाभ नहीं मिला है। सरकार झूठी घोषणाएं कर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने में लगी है और दलित व गरीबों का शोषण कर रही है, जिससे समिति किसी कीमत पर बर्दाशत नहीं करेंगी।

उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में झज्जर रोड स्थित पार्क में डॉ. भीमराव अंबेडकर की भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित करवाना, रोहतक डीसी व एसपी को तुंरत पद से हटाना व एसपी पंकज नैन के खिलाफ पानीपत केस की जांच करके उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना, गरीब, दलितों की सभी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करवाना शामिल है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में दलित बस्तियों में पेयजल का अभाव है और अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है और अपराधी बेखौफ हो कर खुले आम वारदातों का अंजाम दे रहे है। इन्हीं बातों को लेकर मिशन एकता समित ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे दिखाने का निर्णय लिया था। प्रदर्शनकारियों में काफी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही।

बता दें कि हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के चलते जिले के कई निजी स्कूलों को जबरन बंद करा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में अमित शाह की रैली के स्वागत के लिए स्कूल की बसों की मांग की गई थी।

जबकि नियम के मुताबिक राजनैतिक रैलियों के लिए स्कूल की बसों के उपयोग पर प्रतिबंध है। राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राम निवास ने शपथ पत्र में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को इस साल मार्च में कहा था कि सभी प्रतिबंधों को लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

शपथ पत्र में उन्होने कहा था कि रैली के लिए अपनी बसें भेजने के लिए प्रबंधन को मजबूर करना मोटर वाहन अधिनियम 1988 के वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।

Courtesy: nationaldastak.

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