लखनऊ में खतरे की दस्तक, 20 और मरीज स्वाइन फ्लू की चपेट में

लखनऊ (जागरण संवाददाता)। शहर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप जारी है। बीमारी के नियंत्रण पर स्वास्थ्य महकमा फेल साबित हो रहा है। जांच में गुरुवार को आधा दर्जन से अधिक मरीजों में फिर बीमारी की पुष्टि हुई है।
राजधानी के अधिकतर इलाकों में वायरस फैल गया है।

गोमतीनगर, आशियाना, त्रिवेणीनगर, राजाजीपुरम, निरालानगर, जानकीपुरम, विकास नगर समेत तमाम मोहल्लों के लोगों में बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। गुरुवार को जांच में 20 और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। पीजीआइ-केजीएमयू में जांच के बाद मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ रहा है।

गुरुवार को ट्रॉमा में भर्ती एक बच्चे के परिजन केजीएमयू में भटकते रहे, मगर टेमी फ्लू नहीं मिली। इसके बाद परिजनों ने सीएमओ से संपर्क साधा, जिसके बाद उन्हें कार्यालय जाकर दवा लेनी पड़ी। केजीएमयू में वर्तमान में स्वाइन फ्लू के 12 मरीज भर्ती हैं।

केजीएमयू की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भीड़भाड़ में जाने से बचें। खासकर मॉल, रेलवे स्टेशन व बाजार में जाने से वायरस की चपेट में आने का खतरा अधिक रहता है।

सभी को जांच की जरूरत नहीं: डॉ. शीतल ने कहा कि बुखार-जुकाम होने पर बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसी समस्या होने पर व्यक्ति को घर पर आराम करना चाहिए। पैरासिटामॉल का सेवन करें, वहीं खूब पानी पीना चाहिए। डॉ. शीतल के मुताबिक खांसते वक्त मरीज को मुंह पर कपड़ा लगा लेना चाहिए।

 

हाथ की सफाई जरूरी: वहीं हाथ की साफ-सफाई बेहद जरूरी है। अगर व्यक्ति का पांच से सात दिन में बुखार कम नहीं होता या फिर उसके बीपी डाउन, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, उल्टी-दस्त जैसी दिक्कत होती है तो चिकित्सक से परामर्श लेकर स्वाइन फ्लू की जांच कराए।

Courtesy: Jagran.com

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