हामिद अंसारी ने जाते- जाते मोदी सरकार को सुनाई खरी-खरी, कहा- मुस्लिमों में है घबराहट

हामिद अंसारी ने जाते- जाते मोदी सरकार को सुनाई खरी-खरी, कहा- मुस्लिमों में है घबराहट

नई दिल्ली। देश के उप-राष्ट्रपति के तौर पर हामिद अंसारी का दूसरा कार्यकाल गुरुवार को पूरा हो रहा है। वेंकैया नायडू देश के नए उप-राष्ट्रपति होंगे। लेकिन हामिद अंसारी ने जाते-जाते देश की वर्तमान स्थिति को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू में हामिद अंसारी ने मुस्लिमों की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि देश में मुस्लिमों के मन में घबराहट और असुरक्षा की भावना है।

खास बातें-

  1. उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
  2. देश की वर्तमान असहनशीलता और गोरक्षकों की गुंडागर्दी पर साधा निशाना
  3. किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना परेशान करती हैं- हामिद अंसारी
  4. भाजपा नेताओं द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ बयान चिंतित करती हैं- अंसारी

हामिद अंसारी की इस टिप्पणी को देश में बढ़ रही असहनशीलता और कथित गौरक्षकों की गुंडागर्दी से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने भीड़ की ओर से लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, घर वापसी और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना है। सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है। इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है।

 

उन्होंने इसे परेशान करने वाला विचार करार दिया कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ दिए जाने वाले बयान को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अन्य केंद्रीय मंत्रियों के सामने भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों के सामने उठाया है।

सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यूं तो हमेशा एक स्पष्टीकरण होता है और एक तर्क होता है। अब यह तय करने का मामला है कि आप स्पष्टीकरण स्वीकार करते हैं कि नहीं, आप तर्क स्वीकार करते हैं कि नहीं।

 

तीन तलाक के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक ‘सामाजिक विचलन’ है, कोई धार्मिक जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि पहली बात तो यह कि यह एक सामाजिक विचलन है, यह कोई धार्मिक जरूरत नहीं है। धार्मिक जरूरत बिल्कुल स्पष्ट है, इस बारे में कोई दो राय नहीं है।

लेकिन पितृसत्ता, सामाजिक रीति-रिवाज इसमें घुसकर हालात को ऐसा बना चुके है जो अत्यंत अवांछित है। उन्होंने कहा कि अदालतों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे। कश्मीर मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक समस्या है और इसका राजनीतिक समाधान ही होना चाहिए।

Courtesy: nationaldastak.

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