महिलाओं को न कभी पार्टी अध्यक्ष न PM उम्मीदवार बनाने वाली मनुवादी भाजपा आज नारीवादी हो चली है

महिलाओं को न कभी पार्टी अध्यक्ष न PM उम्मीदवार बनाने वाली मनुवादी भाजपा आज नारीवादी हो चली है

आज हमारे देश में महिला सशक्तिकरण की जब भी बात आती है तो सभी राजनैतिक दल उसको भुनाने निकल पड़ते है। महिलाओं के अधिकारों की बातें, महिलाओं के हक़ उन्हें मिलने चाहिए वो कमजोर वर्ग में आती है और न जाने क्या क्या बातें होती आई है। देश को महिला प्रधानमंत्री मिली, राष्ट्रपति मिली मगर आज भी महिला वर्ग धक्के क्यों खा रही है। वजह है आती-जाती सरकारों का दोहरा रवैया। हाल के 5-6 सालों से इस पर अधिक चर्चा हो रही है। मगर हम महिलाओं को दे क्या पाये बस और ट्रेनों में सीट बस उसके अलावा कुछ भी नहीं।

देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए तीन तलाक को गैरकानूनी माना है। कोर्ट ने तीन तलाक पर तत्काल रोक लगा दी है, साथ साथ केंद्र सरकार को तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए 6 महीने का वक्त भी दिया है।

फिलहाल अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले को सतारूढ़ भाजपा पार्टी अपने पक्ष में भुनाने में लगी है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ बहुमत ही सर्वमान्य होता है। अब अगर ऐसे में बहुमत वाली सरकार के प्रतिनिधि इसका श्रेय लेते हैं तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए। भाजपा सरकार और उसके नुमाईन्दे लगातार मुस्लिम महिलाओं के हक की बात करते आ रहे हैं।

कभी प्रधानमंत्री लालकिले के भाषण से मुस्लिम महिलओं के दुःख पर आंसु बहाते हैं, तो कभी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का खून उबाल मारता है मुस्लिम महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों पर। कोर्ट के इस फैसले का भाजपा और कांग्रेस दोनों ने सम्मान किया है।

मगर हेरानी तब हुई जब देश के सारे मनुवादी सोच के प्रगतिशील मर्दों की जमात ने इस पर ख़ुशी का इज़हार किया है। आज महिला उत्थान की बात करने वाली आरएसएस और भाजपा ने महिला सशक्तिकरण का नारा तो खूब अलापा है, मगर कभी अपनी पार्टी का किसी महिला को अध्यक्ष नहीं बनाया है।

आरएसएस  की सर-संचालक कभी कोई महिला नहीं रही है। वहीँ भाजपा के इतिहास पर नज़र डाले तो कभी पार्टी के अध्यक्ष पद या प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। आज तलाक के साथ साथ दहेज़ की प्रथा को भी समाप्त करना होगा, जिसमें हर साल हज़ारो महिलांए अपनी जान गवां रही हैं।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक देश में दहेज़ हत्या में मरने वाली महिलओं की संख्या में इजाफा हुआ है।  पिछले  तीन सालो में दहेज़ हत्या के करीब 24,771 मामले सामने आये है।

जिनमें ज़्यादातर भाजपा शासित प्रदेश शामिल है।जिनमें उत्तर प्रदेश के  7048 , बिहार 3830 और मध्य प्रदेश 2252 शामिल हैं।

भाजपा की मुस्लिम महिलओं के प्रति संवेदना मात्र एक दिखावा है। वरना आजाद भारत में यूनिवर्सिटी से गायब हुए छात्र नजीब की माँ को पिछले एक साल से  लापता बेटे को ढूँढने के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ता, 2002 के दंगो की पीड़ित गुजरात की ज़किया जाफरी को इन्साफ मिल चुका होता।

 

 

भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव के मेनिफेस्टो में राम मंदिर बनाने, धारा 370 हटाने, जैसे सपने बेचे थे। जिसमें तीन तलाक का ज़िक्र कहीं नहीं था। अब अचानक विधानसभा चुनाव आते है तो तीन तलाक़ का शिगूफा छोड़ देते हैं। जिससे जनता का ध्यान उनके चुनावी वादों से हट कर दूसरे मुद्दों पर आ जाये।

ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी को महिलाओं का दर्द समझ नहीं आता, उन्हें समझ आता है मुस्लिम महिलाओं का वो वोट बैंक जिसके वो खवाब देख रहे है। जिसका दावा पार्टी के नेताओं ने उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के बाद दबे लफ्जों में किया था।

महिलाओं की पक्षधर बनी भाजपा को इस वक़्त ये समझाना चाहिए कि ऐसा आजतक उनके तरफ से कोई महिला प्रधानमंत्री के दौड़ में क्यों शामिल नहीं हुई। आज तक नजीब की माँ उनका बेटा क्यों नहीं मिला, और ये भी जवाब देना चाहिए कि कांग्रेस के उस सांसद को जिसने भी जलाया मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने दुःख तक प्रकट नहीं किया।

क्या तब जकिया जाफरी का दर्द उन्हें नहीं दिखा या वो देखना नहीं चाहते थे क्योकि उससे उनके वोटबैंक नाराज़ हो जाते.
भाजपा इन सब मौन रहती है और कभी नहीं बोलेगी क्योकिं भाजपा का रिमोट उनके हाथों में है जो मनुवाद को बढ़ावा देते है, और उनसे उम्मीद करना की वो कुछ अच्छा करेंगे ऐसी उम्मीद भी बेकार।

पूरा देश आज तीन तलाक़ पर ख़ुशी माना रहा है उन्हें एक दहेज़ प्रथा में मारे जानी वाली उन महिलाओं के घर एक जाकर पूछना चाहिए क्या सरकार किसी भी नेता ने आपको जस्टिस दिलाने की कोशिश की है ?

Courtesy: boltahindustan

 

 

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