चारा घोटाले के अलावा बाकी सबको पवित्र मानिए और गोबर में मुंह डुबा कर मर जाइए..!

चारा घोटाले के अलावा बाकी सबको पवित्र मानिए और गोबर में मुंह डुबा कर मर जाइए..!

बिहार के सृजन घोटाले की जो भयानक शक्ल सामने आ रही है, अगर उसके साए में संघी-भाजपाई, सुशील कुमार मोदी और उनके मातहत सोचने-समझने वाले नीतीश कुमार नहीं होते तो अब तक देश और यहां के मीडिया में तूफान मच चुका होता…! मीडिया की नजरे-इनायत हुई भी है तो इस घोटाले की खबरों में एनजीओ और कुछ अफसरों को केंद्र में रखने की कोशिश हो रही है! किसे बचाने की मंशा है, यह समझने के लिए बहुत माथा लगाने की जरूरत नहीं है..!

इस घोटाले के शुरू में ही जिस तरह सुशील मोदी का नाम आ रहा है और जिस तरह नीतीश कुमार यह हंसने वाली दलील दे रहे हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं था, वह यह बताने के लिए काफी है कि तंत्र जिसके साथ होता है, वह पवित्र होता है। और इस देश के तंत्र पर किसका कब्जा है अब तक, यह छिपा नहीं है।

जबकि सबसे पहले सृजन घोटाले का खुलासा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संजीत कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने साल 2013 में ही घोटाले का शक जताते हुए नीतीश सरकार को चिट्ठी लिखी थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ वाले अंतरात्मा कुमार ने उल्टे उसी घोटाले की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी को खुद सम्मानित किया था!

(लगभग इसी तरह ट्रेजरी से पैसे की निकासी की शिकायत सामने आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने तब गोड्डा के जिलाधिकारी को मुकदमा करने का आदेश दिया था और उसी मामले में खुद लालू को मुख्य आरोपी बना कर उन्हें राजनीति के मैदान से बाहर करने की जमीन रची गई थी… मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सेना तक की मदद लेने की कोशिश की गई थी!)

तो सृजन से लेकर व्यापमं या फिर कर्ज या टैक्स माफी के नाम पर अंबानी-अदानी टाइप कारोबारियों को लाखो़ करोड़ के तोहफे देना और बदले में उन्हीं कॉरपोरेटों से अरबों रुपए बेमानी चंदा लेना भ्रष्टाचार नहीं है..! सब खुल्लमखुल्ला करने के बावजूद पंडों का मोहरा बना नेता गाना गा रहा है कि इस देश से भ्रष्टाचार खत्म हो गया! दूसरी ओर, सिर्फ केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट में पिछले डेढ़-दो सालों में भ्रष्टाचार के मामलों में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आंकड़ा दर्ज किया जाता है!

अब तक इस देश में भ्रष्टाचार अगर कुछ है तो वह केवल पशुपालन घोटाला! बाकी सब पवित्र है। यही मान लीजिए और गोबर में मुंह डुबा कर मर जाइए..!

Courtesy: nationaldastak.

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