यहां सरकारी स्कूलों की ऐसी है स्थ‍ित‍ि, कहीं बना है तबेला तो कहीं है जर्जर

इलाहाबाद.योगी सरकार ने प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों की हालत को दुरुस्त करने का दावा और वादा तो क‍िया है, लेकिन यह हकीकत के धरातल पर कहीं क्रियान्वित होते नजर नहीं आ रहा है। यूपी के इन सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था से इलाहाबाद हाईकोर्ट तक चिंतित है। बावजूद इसके शासन स्तर पर इसमें कोई आमूलचूल परिवर्तन फिलहाल नजर नहीं आ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 1506 स्कूलों में आज भी स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों खुले में टॉयलेट जाने को मजबूर हैं। 54, 121 प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूलो में बाउंड्रीवाल नहीं हैं। 2,921 स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। वहीं, कई स्कूल तो तबेला बन गए हैं, जहां स्टूडेट्स की जगह भैंस-बकरी आद‍ि बंधे नजर आते हैं।
प्रदेश में हैं टोटल 1,58,839 प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूल
– आंकड़ों पर गौर करें तो यूपी में टोटल 1, 58,839 (1 लाख 58 हजार 839) प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं, जो शहरी क्षेत्र से लेकर गांव के दूर अंचल तक स्थित है।
– कहने को तो इन विद्यालयों में पढ़ाई से लेकर किताब, कॉपी, ड्रेस, जूता-मोजा और दोपहर का भोजन तक फ्री है। लेकिन एक प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूल के स्टूडेंट की उन जरूरतों को अभी भी नजरअंदाज किया जाता है।
आज भी 68,603 प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों में जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं बच्चे
– आज भी प्रदेश के तकरीबन 68,630 ऐसे प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं, जहां बच्चों को जमीन पर बि‍ठाकर पढ़ाया जाता है। क्योंकि, यहां डेस्क और बेंच की व्यवस्था नहीं है। सैकड़ों विद्यालयों में आज भी शौचालय की सुविधा नहीं है।
– 55,1 25 विद्यालयों की बाउंड्रीवाल ही नहीं है, जिससे यहां पर गाय-भैंस लेकर अराजकतत्वों तक का जमावड़ा बना रहता है।
यूपी के प्राइमरी स्कूलों की संख्या और स्थिति
– प्रदेश में टोटल 1,13,249 प्राइमरी स्कूल हैं।
– इनमें 3 लाख 99 हजार 273 टीचर पोस्टेड हैं।
– इनमें से 53,284 विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। यहां के बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं ।
– 35,233 प्राइमरी स्कूलों में अभी तक बाउंड्रीवॉल नहीं बनाई गई है।
– 60,221 विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था नहीं है
– 1,542 विद्यालयों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है ।
– 547 विद्यालयों में जेंट्स और 474 विद्यालयों में लेडीज टॉयलेट नहीं है।
– इन विद्यालयों के स्टूडेंट्स और टीचर आज भी जरूरत पड़ने पर खुले में टॉयलेट जाने को विवश हैं।
यूपी के हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या और स्थिति
– प्रदेश में होटल 45590 हायर सेकेंडरी स्कूल (उच्च प्राथमिक विद्यालय) हैं।
– इन हायर सेकेंडरी स्कूलों में 1 लाख 64 हजार 3 टीचर पोस्टेड हैं।
– 18,888 स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है।
– 23,314 स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है।
– 1,379 स्कूलों में पीने का पानी नहीं है।
– 334 स्कूलों में जेंट्स और 151 स्कूलों में लेडीज टॉयलेट नहीं है।
-लिहाजा, इन स्कूलों के बच्चे और टीचर खुले में टॉयलेट जाने को विवश है।
सिस्टम की दुर्दशा की वजह से ही सरकारी स्कूलों में नहीं बढ़ पा रही स्टूडेंट्स की संख्या
– सिस्टम की इसी दुदर्शा की वजह से आज भी प्राइमरी और हर सेकेंडरी स्कूलों में छात्रों की संख्या निरंतर घटती जा रही है।
– प्रदेश सरकार के तमाम दावे और सुविधाएं रोजमर्रा की जरूरतों के अभाव के आगे कमतर प्रतीत हो रही है।
– यही वजह है कि आज एक आम आदमी अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों के बजाए प्राइवेट स्कूलों में एडमिट कराने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाता है।
– बावजूद इसके इन प्राइवेट स्कूलों में न तो प्रशिक्षित शिक्षक होते हैं और न ही वह तमाम सुविधाएं जो सरकारी स्कूल में उपलब्ध है।
हाईकोर्ट भी जता चुका है नाराजगी
– इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर कोर्ट में पिछले सप्ताह 29 अगस्त को सुनवाई करते हुए स्कूलों की इस तरह की स्थिति का आंकड़ा देखकर चिंता जता चुका है।
– इस संबंध में हाईकोर्ट की ओर से बेस‍िक श‍िक्षा अध‍िकारी (बीएसए) इलाहाबाद को फटकार भी लगाई गई है और जिले के स्कूलों का निरीक्षण करके वहां की कमियों को तत्काल दूर कराने का निर्देश दिया गया है।
– खासकर पेयजल और शौचालय जैसी व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त कराने को कहा गया है। स्कूलों में बिजली की व्यवस्था का भी निर्देश द‍िया गया है।
क्या कहते हैं बीएसए इलाहाबाद
– इलाहाबाद के बीएसए संजय कुशवाहा ने बताया, जिले के सभी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के विद्यालयों में पेयजल, शौचालय और बिजली की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से दुरुस्त कराने का निर्देश दिया जा चुका है ।
– जल्द ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। सभी विद्यालयों की चाहरदीवारी बनाने के लिए धन उपलब्ध कराने के ल‍िए शासन को लिखा गया है।
– जैसे ही पैसा मिल जाएगा, बाउंड्रीवाल समेत अन्य कार्यों को भी पूरा कराया जाएगा। बच्चों के बैठने की व्यवस्था का जहां तक सवाल है। प्राइमरी के बच्चों को अभी टाटपट्टी पर बि‍ठाया जाता है, लेकिन जूनियर हाईस्कूल के बच्चों को डेस्क बेंच की व्यवस्था है। अगर कहीं पर नहीं है तो उसकी जांच कराकर उसे दूर कराया जाएगा।
Courtesy: Bhaskar.com
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