लखनऊ में 8th क्लास के स्टूडेंट ने लगाई फांसी, ब्लू व्हेल गेम खेलने का शक

लखनऊ. इंदिरानगर के ‘B’ ब्लाॅक में रहने वाले रूपेश कुमार सिंह के बेटे आदित्य वर्धन सिंह ने फांसी लगा ली। आदित्य वर्धन की उम्र 13 साल बताई जा रही है। वह एक प्राइवेट स्कूल में 8th क्लास में पढ़ता था। घर वालों का कहना है कि एक हफ्ते से आदित्य अपनी मां अरुणा के मोबाइल में एक ऑनलाइन गेम खेल रहा था। ऐसा शक है कि ब्लू व्हेल गेम खेलने के चक्कर में उसकी जान गई। करीब 2 घंटे तक खेलता रहता था गेम…
– मूलरूप से हरदोई के मुन्ने मियां चौराहे के रहने वाले रूपेश किसान हैं। उनकी पत्नी अरुणा इकलौते बेटे आदित्य और बेटी सोनाली के साथ कई सालों से इंदिरानगर में बने अपने पिता यूपी सिंह के घर पर रहती हैं। यूपी सिंह ने बताया कि आदित्य ने गुरुवार दोपहर घर के फर्स्ट फ्लोर पर अपने कमरे में दुपट्टे और पंखे के सहारे फांसी लगा ली।
– “पिछले एक हफ्ते से आदित्य मोबाइल में काफी देर तक गेम खेलता रहता था। वह हर रोज शाम के वक्त अपनी मां का मोबाइल फोन लेकर छत पर चला जाता था। करीब दो घंटे तक गेम खेलने के बाद वापस नीचे आता था।”
– घर वालों ने खतरनाक गेम के चलते आदित्य की मानसिक हालत प्रभावित होने और फिर आत्महत्या कर लेने की अाशंका जताई है। आज (शुक्रवार) को आदित्य की परीक्षा भी थी।
– आदित्य वर्धन के मामा आरके सिंह ने बताया कि वो पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन मां के मोबाइल पर गेम खेलता रहता था।
नहीं हुआ पोस्टमार्टम
– इंस्पेक्टर (गाजीपुर) गिरजा शंकर के मुताबिक, घर वालों ने बॉडी का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। लिहाजा शिकायत लेकर बॉडी का पंचनामा कर दिया गया। बॉडी घर वालों को सौंप दी गई।
– “आदित्य के पास मोबाइल फोन नहीं था, वह मां के मोबाइल पर गेम खेलता था। फैमिली का कहना है कि हो सकता है कि किसी खतरनाक गेम के चक्कर में उसने आत्महत्या की हो। हालांकि फैमिली ने इस बारे में कोई शिकायत नहीं दी है।”
क्या है ब्लू व्हेल गेम?
# गेम नहीं, एक ट्रैप (जाल)
– टीन एजर्स गेम मानकर ब्लू व्हेल के जाल में फंस रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ब्लू व्हेल ऐप तलाशे जा रहे हैं, लेकिन असल में यह न तो गेम है और न ही ऐप है। यह अपराधी किस्म के लोगों का एक ट्रैप (जाल) है, जो दुनियाभर में अब तक 130 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। नासमझी में बच्चे इसका आसानी से शिकार बन रहे हैं।
# कहां बनाया गया ब्लू व्हेल?
– ‘ब्लू व्हेल’ के पीछे मास्को (रूस) के साइकोलॉजी स्टूडेंट फिलिप बुडेईकिन का दिमाग है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है और वह तीन साल की सजा काट रहा है। गेम से पहली मौत का मामला 2015 में आया था। गिरफ्तारी के बाद फिलिप ने कहा था, ”गेम का मकसद समाज की सफाई करना है। फिलिप की नजर में सुसाइड करने वाले सभी लोग ‘बायो वेस्ट’ (समाज के लिए गैर-जरूरी) थे।”
# कैसे खेला जाता है ब्लू व्हेल?
– एडमिन की ओर से प्लेयर को रोज 50 दिन तक अलग-अलग टास्क दिए जाते हैं। फोटो शेयर कर टास्क पूरा होने का सबूत देना होता है। शुरुआती टास्क तो आसान होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे टास्क खतरनाक होते जाते हैं। आखिर में प्लेयर को ऐसी हालत में पहुंचा दिया जाता है कि वो एडमिन के आखिरी टास्क को पूरा करने के लिए सुसाइड के लिए तैयार हो जाए।
# ब्लू व्हेल खोजने में टॉप 10 शहरों में 7 भारत के
– सरकार के रोक लगाने के बावजूद ब्लू व्हेल गेम काफी सर्च किया जा रहा है। 30 अगस्त तक गूगल सर्च के ट्रेंड से मिले डाटा के मुताबिक कोच्चि में नेट पर यह गेम दुनिया में सबसे ज्यादा सर्च किया गया। सालभर में कोच्चि में इसकी 100 गुना ज्यादा बार सर्चिंग हुई। दुनिया के टॉप 10 शहरों में 7 भारत के हैं। तिरुवनंतपुरम दूसरे और कोलकाता तीसरे पर है। बेंगलुरू छठे पर है। टॉप 10 में अन्य भारतीय शहर गुवाहाटी, मुंबई और दिल्ली भी हैं। भारत के अलावा अन्य देशों के तीन शहर सैन-ऐंटोनियो, नैरोबी और पेरिस शामिल हैं। वहीं सर्च करने वाले टॉप देशों में भारत चौथे नंबर पर है।
Courtesy: Bhaskar.com
Categories: Crime

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