मोदीजी को न लाखों किसान दिखते हैं, न रोजगार मांग रहे शिक्षामित्र… इन्हें सिर्फ ‘बुलेट ट्रेन’ दिखती है

दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूपी के 50 हजार शिक्षामित्र धरना-प्रदर्शन पर है। शिक्षामित्रों का यह प्रोटेस्ट 11 सितम्बर से जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अगर मांगे नहीं मानी गई तो शिक्षामित्र आमरण अनशन भी करेंगे। लिहाज़ा मीडिया ने इस खबर को नजरअंदाज कर दिया।

इस पर सपा प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने ट्विट कर मीडिया पर निशाना साधा, उन्होंने लिखा कि, मीडिया को ना यूपी के शिक्षामित्रों का प्रदर्शन दिखता और ना ही किसानों का आंदोलन। उन्हें दिखाई देता है तो सिर्फ जापान के बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट से भारत की तरक्की।

क्या है मामला.. 
सुप्रीम कोर्ट ने बीते 25 जुलाई को प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया है। उसके बाद से शिक्षामित्र आंदोलन प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद शिक्षामित्रों से कई बार बातचीत की और शासन का प्रतिनिधिमंडल भी कई बार बात कर चुका है।

पिछले दिनों उनका मानदेय बढ़ाने पर कैबिनेट मुहर लगा चुका है, लेकिन इससे शिक्षामित्र खुश नहीं है। वह समान कार्य का समान वेतन देने की मांग पर अड़े हैं और लगातार आंदोलन प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच यूपी सरकार में मंत्री एसपी बघेल ने कहा- शि‍क्षामित्र प्रदर्शन कर रहे हैं तो करें, सरकार कुछ नहीं कर सकती। लेकिन इसके बाद भी शिक्षामित्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

वहीँ देश में तेजी से बढ़ते आंदोलन के इस माहौल में 1 सितंबर से राजस्थान के सीकर में किसानों का अनिश्चितकालीन आंदोलन चल रहा है। कर्जा माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहा है। यहां किसान 13 दिन से आंदोलन पर है।

 

सीकर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजस्थान के 14 ज़िलों में फैल गया है। 10 सितंबर को ज़िले के प्रभारी मंत्री से सीकर सक्रिट हाउस में बातचीत हुई मगर असफल रही। उसके बाद किसानों ने चक्का जाम किया।

देश के मौजूदा हालात से यह पता चल रहा कि हर तरफ हाहाकार मच हुआ है। बेबस किसान और शिक्षामित्र सड़क पर इंसाफ की गुहार लगा रहे है। मगर लोगों का कहना है की बुलेट ट्रेन की रफ्तार से देश तरक्की कर रहा है।

 

Categories: India

Related Articles