BHU कैंपस में गुंडों का राज जारी रहेगा क्योंकि VC अपने गुंडों को प्यार से ‘राष्ट्रवाद’ कहते हैं- सोशल

अरे मारेंगे नहीं। अंदर नहीं आएँगे।”

“अरे नहीं, मारना शुरू कर दिया। मार कैसे सकते हैं! ये तो मार रहे हैं!”

बीएचयू की लड़कियों की ये बातें सुनना किसी यातना से कम नहीं है। किस निर्ममता के साथ उनका भरोसा तोड़ा गया। कितना विश्वास था उन्हें लोकतंत्र पर। पुरुष पुलिसकर्मी उन्हें नहीं मारेंगे। यही तो सोचा था 20-25 साल की उन लड़कियों ने। डर से ज़्यादा आश्चर्य था उनके चेहरे पर।

सभ्यता, संस्कृति और सत्ता के नए मसीहाओं, शर्म से आपका कोई रिश्ता-नाता तो है नहीं। आपसे उम्मीद भी नहीं है। जिनकी आँख का पानी अभी सूखा नहीं है, उनसे उम्मीद बची है। काँपती आवाज़ का दर्द वही महसूस कर सकते हैं। अपने कैंपस में आज़ाद घूमने के अधिकार की बात कहने पर सड़क पर गिराई गई और उसके बाद पुुलिसवालों के पैरों तले कुचली गई लड़कियों की आवाज़ बनिए। तमाम कैंपसों में उनकी आवाज़ सुनाई दे, ऐसे हालात बनाने में सहयोग कीजिए। समाज को जगाने का अलार्म अब कैंपस ही बजाएगा। बहुत गहरी नींद में है समाज। समझ में नहीं आता कि इसे मौत कहें या नींद।

” लड़की के सिर में चोट लगी थी। कुर्सी दिखी। बैठ गई। एक और लड़की उसे दिखी। उसके पैर में चोट लगी थी। सिर में चोट वाली लड़की उठ गई। पूरी संवेदना के साथ पैर की चोट वाली लड़की को कुर्सी पर बिठाया। दृश्य बीएचयू का है। वीडियो आपने भी देखा होगा। जो पीढ़ी दर्द में ऐसी संवेदना दिखाती है, उसके रहते हम नाउम्मीद कैसे हो सकते हैं? “

 बीएचयू के वीसी ने कहा है कि कैंपस में राष्ट्रवाद को बनाए रखने के लिए वे कुछ भी करेंगे। देश के पीएम ने कहा है कि उनके लिए दाल से ज़्यादा महत्वपूर्ण देश है। भावार्थ यह है जनता अपनी सुरक्षा और पेट से जुड़े मसलों के लिए सरकार से कोई उम्मीद न रखे। बस आधार जुड़वाती रहे, कभी अलना से तो कभी फलना से। और पुलिस की मार खाती रहे, कभी इस मसले पर तो कभी उस मसले पर।
सही कह रहे हैं आप, बीएचयू के कुलनाशपति महोदय। वामपंथी बदमाश होते हैं। लड़की के कान में बोल जाते हैं कि उस पर यौन हमला हुआ था। तभी तो आपके राष्ट्रवादी कैंपस मेंं लड़कियाँ हल्ला मचाने लगी हैं। वे नहीं होते तो लड़कियों को पता ही नहीं चलता कि उन पर हमला हुआ था। कैंपस के बाहर भी ये वामपंथी बदमाशी करते हैं। ग़रीब के कान में बोल देते हैं कि उसे भूख लगी है। तभी तो ग़रीब चिल्लाने लगे हैं। वामपंथी ही बदमाश हैं।
Courtesy: boltahindustan
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