अर्थव्यवस्था पर चारों खाने चित्त हुई भाजपा, क्या बचने के लिए फिर रोबर्ट वाड्रा का दरवाजा खटखटाएंगे?

अर्थव्यवस्था पर चारों खाने चित्त हुई भाजपा, क्या बचने के लिए फिर रोबर्ट वाड्रा का दरवाजा खटखटाएंगे?

-अरुण कुमार

सोशल मीडिया पर एक कहावत मशहूर है, आम लोगों पर संकट आता है तो हनुमान जी को याद करते हैं और बीजेपी पर संकट आता है तो रोबर्ट वाड्रा को याद करते हैं. कुछ दिन पहले कुछ ट्विटर यूजर्स ने एक हैशटैग शुरू किया- #भाजपासंकटमोचक_Vadra और ये कहा कि सरकार जब भी संकट में आती है तब अचानक रोबर्ट वाड्रा की खबर आने लगती है

 

पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो कहीं न कहीं ये बात सही भी लगती है। दिसंबर 2014 में RSS के घर वापसी कार्यकर्म के कारण बीजेपी की केंद्र सरकार की बदनामी शुरू हुई तो अचानक रोबर्ट वाड्रा की न्यूज़ मीडिया में आने लगी! ये कोई एक इंसिडेंट नहीं था, जैसे ही केंद्र सरकार किसी दबाव में होती रोबर्ट वाड्रा न्यूज़ में आने लगते, चाहे व्यापम घोटाला हो, ललित मोदी और वसुंधरा राजे व सुष्मा स्वराज का ललित मोदी को मदद पहुंचाने का मामला हो, विजय माल्या का करोड़ों का लोन लेकर भागना हो, करोड़ों की जमीन कौड़ी के भाव में हेमा मालिनी, एकनाथ खड़से और आनंदी बेन पटेल को को देने की खबर हो या किसी और मुद्दे पर केंद्र सरकार घिरी है तो अचानक रोबर्ट वाड्रा न्यूज़ में लगे और उनको टारगेट किया जाने लगा

सोशल मीडिया पर एक और वाक्य अक्सर लिखा जाता है When in trouble dial V for Vadra

 

कोर्ट ने कई बार कहा है आप राजनीति के लिए किसी की पर्सनल इमेज को नहीं बर्बाद कर सकते और आम लोगों में भी ये धारणा आने लगी है, केंद्र में सरकार आपकी और राज्य में सरकार आपकी फिर भी आप कोई आरोप साबित नहीं कर सके तो कहीं ना कहीं ये राजनीतिक मकसद के कारण उन पर हमले किये जा रहे थे

केंद्र सरकार जिस तरह से सभी मुद्दों पर चारों तरफ से घिरी हुई है और यशवंत सिन्हा से लेकर, शत्रुघ्न सिन्हा, अरुण शौरी और सुब्रमण्यम स्वामी तक एक एक करके भाजपा के सगे भी इस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, लगता है रोबर्ट वाड्रा भी अबकी बार सरकार को नहीं बचा पायेगें

 

 

Categories: Opinion