मोदी राज में सेना के जवान बुनियादी हथियारों के लिए भी तरस रहे हैं?

मोदी राज में सेना के जवान बुनियादी हथियारों के लिए भी तरस रहे हैं?

नई दिल्ली
भारतीय सेना अभी तक नए आधुनिक हथियार और उपकरण की बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित है। सैनिकों के प्रयोग करने वाले राइफल, स्नाइपर गन से लेकर हल्के वजन वाले मशीनगन से लेकर युद्ध में प्रयोग होने वाले कार्बाइन्स जैसी बुनियादी चीजें भी मानक स्तर की नहीं हैं। दशकों तक विदेशों से हथियार और सामग्री मंगवाते रहने और स्वदेशी विकल्पों के लगातार फेल होने के कारण आज तक स्थिति गंभीर बनी हुई है।

पिछले सप्ताह आर्मी कमांडर की हुई कॉन्फ्रेंस में छोटे हथियारों को युद्धक्षेत्र तक ले जाने में अभी भी काफी समय लगता है, इस समस्या को फिर से उठाया गया। इस मौके पर आर्मी चीफ बिपिन रावत ने अपने सीनियर कमांडरों को कहा कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया में संतुलन और सही स्थान दोनों का ही ध्यान रखना होता है। बड़े ऑपरेशन के लिए के तोपखाने, बंदूक, एयर डिफेंस मिसाइल और हेलिकॉप्टर को लेकर कुछ योजनाएं ट्रैक पर हैं लेकिन छोटे हथियार अभी भी चिंता का कारण हैं।

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को एक सूत्र ने बताया, ‘अभी की स्थिति में 12 लाख की क्षमता वाले भारतीय सेना को 8,18,500 न्यू जेनरेशन असॉल्ट राइफल्स की जरूरत है। इसके साथ ही 4,18,300 क्लोज क्वॉर्ट बैटल कार्बाइन, 43,700 लाइट मशीनगन और 5,679 स्नाइपर राइफल खरीदने की योजना है। इन आंकड़ों में एयरफोर्स और नेवी भी शामिल है।’

हथियारों की इस खरीद के लिए एक एक निश्चित संख्या विदेशी कंपनी से सीधे तौर पर खरीदने की योजना थी और बाकी तकनीक ट्रांसफर की सहायता से देश में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना पर अभी तक ठीक तरह से अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।

उदाहरण के लिए सितंबर 2016 में सेना को न्यू जेनरेशन 7.62 x 51mm असॉल्ट राइफल को रीलॉन्च करने के लिए जबरन वैश्विक खोज के लिए निर्देश दिया गया। पुराने 5.56mm INSAS (इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम) राइफल्स को पिछले दशक में भ्रष्टाचार के आरोप, अव्यावहारिक तकनीकों के इस्तेमाल जैसे कारणों से हटाना पड़ा था। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में इसकी रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी।

सूत्रों के अनुसार, ‘500 मीटर तक मारक क्षमता वाले नए असाल्ट राइफ्लस की जरूरत संबंधी प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब औपचारिकता के तहत इसे रक्षा मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और खरीद और बिक्री (भारतीय) मॉडल के लिए औपचारिक टेंडर निकालने के पहले मंत्रालय की स्वीकृति ली जाएगी।’

Courtesy: NBT
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