गुजरात में ‘विकास’ की खुली पोल, PM मोदी के गुजरात दौरे से पहले नई करेंसी और शराब बरामद

गुजरात में ‘विकास’ की खुली पोल, PM मोदी के गुजरात दौरे से पहले नई करेंसी और शराब बरामद

1960 में जब महाराष्ट्र से अलग होकर गुजरात वजूद में आया तब से ही वहां शराब पर पाबंदी है। यही वजह है कि गुजरात को ड्राई स्टेट भी कहा जाता है।

वैसे तो गुजरात कितना ‘ड्राई’ है और कितना ‘वेट (गीला)’ इसका भांडाफोड़ कई बार हो चुका है लेकिन रविवार के दिन वडोदरा के दुमाद क्षेत्र के पास जो हुआ वो नजारा हैरान करने वाला था।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सफेद मारुति सेलेरियो एक्सप्रेसवे पर एक काली मर्सिडीज-बेंच कार से टकरा गई। इस टक्कर की वजह से अवैध रूप से ले जाए जा रहे बियर के कार्टन्स सड़क पर गिरकर फट गए और बियर की कैन्स सड़क पर बिखर गईं। बियर कैन्स को सड़क पर बिखरा देख लोगों में इन्हें लूटने की होड़ मच गई।

इस घटना की वजह से एक्सप्रेसवे पर जाम लग गया। बताया जा रहा कि सड़क से गुजरने वाले लगभग हर इंसान ने बियर की कैन्स लूटी।

इतना ही नहीं आसपास के जिस-जिस को सूचना मिली वह बियर की कैन लूटने के लिए घटनास्थल पर दौड़ा-दौड़ा पहुंच गया था।

हैरान करने वाली बात ये भी है कि जिस राज्य में 57 साल से शराबबंदी है वहां की जनता को शराब की इतनी लत कैसे कि वो बियर के लूट मार करने को उतारू हो गई? कार के दुर्घटनाग्रस्त होते ही ड्राइवर फरार हो गया।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस घटना की दो तस्वीरें ट्वीट की जिसमें ये दिख रहा कि जिस कार से शराब बरामद हुई उसपर नंबरप्लेट नहीं है। हालांकि ये भी आशांका जताई जा रही है कि दुर्घटना के दौरान नंबर प्लेट निकल गई हो।
बात दें कि आज (16 अक्टूबर) प्रधानमंत्री का गुजरात दौरा भी है और राज्य में जल्द चुनाव भी होने वाले है। ऐसे में कई लोग अवैध शराब की तस्करी गुजरात चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
वडोदरा के इस घटना से ये साबित होता है कि वहां कि सरकार शराबंदी को लागू करने में किस करद असफल रही है! क्या बीजेपी शासित गुजरात में शराबबंदी सिर्फ दस्तावेजों में हुई है?
बीबीसी में प्रकाशित प्रशांत दयाल कि रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 6 सालों में वहां 2500 करोड़ रुपए की अवैध शराब ज़ब्त हुई। राज्य में ग़ैरक़ानूनी ज़हरीली शराब पीने से अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन आजतक एक भी शराब बेचने वाले या पीने वाले को सज़ा नहीं हुई है।
चूंकि दस्तावेजों में ही सही लेकिन गुजरता में शराब पर पाबंदी है जिसकी वजह से कथित रूप से राजस्व का नुकसान होता है। इसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार सूबे को सालाना 1200 करोड़ देती है और ये राशि 1960 से आज तक लगातार मिल रही है।

Courtesy: boltahindustan.

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