अंबानी-अडानी के विकास में पिछड़ा गरीबों का विकास, गुजरात ‘कुपोषण’ और ‘शिशु मृत्यु दर’ में सबसे आगे

अंबानी-अडानी के विकास में पिछड़ा गरीबों का विकास, गुजरात ‘कुपोषण’ और ‘शिशु मृत्यु दर’ में सबसे आगे

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में तीन दिनों में 18 बच्चों की मौत हो गई। गुजरात को भाजपा 2014 से विकास की परिभाषा के रूप में बताती आई है। इसलिए इस घटना ने पूरे देश का ध्यान गुजरात की ओर खींचा है। अस्पताल ने बताया कि इन बच्चों की मौत इसलिए हुई क्योंकि इनमें से ज़्यादा underweight यानि कुपोषण के शिकार थे।

ये घटना और इसका कारण गुजरात में हुए असमान विकास को दर्शाती है। गुजरात जो कि उद्योगों के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है वो शिशु मृत्यु दर में 29 राज्यों में 17 वे और कुपोषण के मामले में देश में 25 वे स्थान पर है।
नमूना पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट 2015 के मुताबिक, केरल (12), तमिलनाडु (19), महाराष्ट्र (21) और पंजाब (23) की तुलना में गुजरात में प्रति एक हज़ार नवजीवित जन्मे बच्चों में से 33 मर जाते हैं।

बच्चों का वज़न कम होने यानि कुपोषण में गुजरात देश में 25 वे स्थान पर है। इस मामले ये सिर्फ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड से आगे है।

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के मुताबिक गुजरात में 39% बच्चों का वज़न कम है। जबकि राष्ट्रीय औसत 35% है। इस मामले में भी देश के अन्य राज्य गुजरात से बेहतर हैं।

केरल में ये दर 16%, पंजाब में 21%, तमिलनाडु में 23% और महाराष्ट्र में 36% है। यहां तक कि मिज़ोरम (11.9%) और मणिपुर (13.8%) जैसे छोटे राज्य भी गुजरात से अच्छी स्तिथि में हैं।

सवाल ये है कि भाजपा के ये स्वस्वयं घोषित गुजरात विकास मॉडल क्या बच्चों की लाशों पर बना है? ये कैसा विकास है जहाँ उद्योग और उद्योगपतियों के लाभ में वृद्धि हुई है लेकिन आम जनता का ये हाल है कि वो अपने बच्चों को मरने से भी नहीं बचा पा रही है।

इतने असमानता से भरे विकास मॉडल को क्या उस देश में लागू करना सही होगा जिसमे अधिकतर जनसँख्या आज भी गरीब है? शायद यही वो एक तरफा विकास है जिसके कारण गुजरात की जनता इस बार भाजपा के खिलाफ खड़ी है।

 

Courtesy: boltahindustan

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