दर्जनों मौतों और लाखों की बेरोजगारी की जिम्मेदार ‘नोटबंदी’ का एक बरस नहीं बल्कि बरसी है आज : अखिलेश यादव

दर्जनों मौतों और लाखों की बेरोजगारी की जिम्मेदार ‘नोटबंदी’ का एक बरस नहीं बल्कि बरसी है आज : अखिलेश यादव

आज नोटबंदी को एक साल हो गया हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोटबंदी को लेकर कहा है कि बीजेपी सरकार ने नोटबंदी के ज़रिए जो उद्देश्य बताए थे वो सब महज खोखले वादे थे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले को अदूरदर्शी निर्णय बताया और कहा कि इससे आर्थिक जगत में आराजकता का माहौल पैदा हुआ है। देश में बेरोज़गारी अपने चरम पर है वहीं निर्माण कार्य बंद होने से देश की जनता गरीबी का दंश झेल रही है।

अखिलेश ने आगे कहा कि जिस नोटबंदी के दौर में दर्जनों लोगों की जाने चली गई, लोगों के शादी-ब्याह और अंतिम संस्कार तक में अड़चनें पैदा हो गई और मध्यम वर्ग और कम कमाने वाले परिवारों का बजट भी बिगड़ गया उसको लेकर भाजपा सरकार ‘जश्न‘ मनाए तो यह भारत की जनता का उपहास है।

आपको बता दें कि सबसे ज्यादा नोटबंदी की मार गरीब पर पड़ी क्योंकि बिल्डिंग उद्योग में लगे करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। बड़ी कम्पनियों ने अपने यहां छंटनी कर दी हैं, देश की विकास दर में भारी गिरावट आई है, आकड़ों के मुताबिक यह दर 1 फीसदी से भी कम है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि रूपया काला सफेद नहीं होता बल्कि लेन-देन काला सफेद होता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से आतंकवादी और नक्सलवादी गतिविधियों पर रोक लगेगी, लेकिन हकीकत यह है कि कश्मीर घाटी में पहले से ज्यादा आतंकी घटनाएं घट रही हैं, नक्सली गतिविधियां लगातार हो रही हैं।

उन्होंने आगे कहा “प्रधानमंत्री मोदी ने कालेधन का हौवा खड़ा किया लेकिन रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया कि जो नोट बंद किए गए थे उसमें से 99 प्रतिशत वापस बैंक में आ गए हैं। तो काला धन कहाँ बचा?

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने अपनी छवि चमकाने के लिए रिज़र्व बैंक और अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को विश्वाश में लिए बगैर ही इतना बड़ा राजनीतिक फैसला लिया जिससे उन्हें कई बार नियम बदलने पड़े।

उन्होंने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ है रिज़र्व बैंक मानता है कि नोटबंदी के नए नियमों की वज़ह से नकदी का प्रवाह रुक गया, जिसकी वज़ह से किसान को औने-पौने अपनी फसल बेचनी पड़ी। क़र्ज़ में डूबे किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा, आलू, धान और गन्ना किसानों पर नोटबंदी की बुरी तरह मार पड़ी।

नोटबंदी और जीएसटी का फैसला मनमाना, अलोकतांत्रिक और जनविरोधी कदम था। लेकिन मोदी की पूरी सरकार और उनके मंत्री एक गलत फैसले को सही ठहराने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे है। देश के सामने जो बुनियादी समस्याएं हैं, उनके समाधान की बजाय भाजपा सरकार लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा सरकारों का काम जनता को धोखा देना नहीं हो सकता।

इस सन्दर्भ में उन्होंने एक ट्वीट भी किया – ‘अर्थव्यवस्था की बदहाली, कारोबार-उद्योग की बर्बादी व देशव्यापी बेरोज़गारी में नोटबंदी का जश्न दुखद है. ये नोटबंदी का एक बरस नहीं बरसी है’.

 

Courtesy: boltahindustan

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