नोटबंदी में 150 मौतें, लाखों बेरोजगार औऱ हजारो कारखाने बंद हो गए, क्या इसी का ‘जश्न’ मनाएगी मोदी सरकार ?- कांग्रेस

नोटबंदी में 150 मौतें, लाखों बेरोजगार औऱ हजारो कारखाने बंद हो गए, क्या इसी का ‘जश्न’ मनाएगी मोदी सरकार ?- कांग्रेस

नोटबंदी को एक साल पूरा होने जा रहा है। नोटबंदी का असर काफी नुकसानदायक था। सैकड़ों मौतें, चीखें-चीत्कारें और तमाम तकलीफों ने पूरे भारत को परेशान कर दिया था।

एक साल पूरा होने पर सत्तारूढ़ भाजपा तमाम तकलीफों को भूलकर जश्न मनाने की घोषणा कर चुकी है लेकिन पूरा विपक्ष इस दिन को काला दिन के रूप में मनाएगा।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बजवा ने ट्वीट करते हुए पीएम और बीजेपी पर निशाना साधा, उऩ्होंने कहा कि कल नोटबंदी की पहली सालगिरह मनाई जा रही है। ये अब तक की सबसे बड़ी लूट और अब तक सबसे घोटाला है।

 

नोटबंदी के बाद जो समस्या पैदा हुई विपक्षी दल उन्हीं समस्या को अपना हथियार बनाकर बीजेपी को लगातार घेर रहा है।

कांग्रेस सांसद ने अगले ट्वीट में कहा कि नोटबंदी की वजह से 150 से लोगों ने अपनी जान गवा दी, लाखों लोग बेरोजगार हो गए हजारों कारखाने बंद हो गए।

बीजेपी किस बात का जश्न मना रही है। हजारों जान जाने का की लाखों नौकरी खोने का? पीएम और बीजेपी को नोटबंदी पर विफलता मान लेनी चाहिए।

 

 

गौरतलब है कि पिछले साल 8 नवम्बर के मध्यरात्रि से प्रधानमंत्री द्वारा 500 और 1000 के नोट को अमान्य घोषित करने के बाद से कितने गरीब मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

गौर करने वाली ये बात ये की जब इस सन्दर्भ में गृहमंत्रालय से पूछा गया की 8 नवंबर से 30 दिसंबर तक बैंक की कतार में नोट बदलवाने के दौरान कितनी मौतें हुई। तो उनके पास इसका कोई भी जवाब सीधे तौर पर नहीं था। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोटबंदी के कारण करीब 150 लोगों कोअपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।

सबसे पहली आरटीआई 26 दिसंबर को गृह मंत्रालय में लगाई गई। क्योकिं गृह मंत्रालय कानून व्यवस्था के अलावा अप्राकृतिक मौतों का रिकॉर्ड भी रखता है।

मोदी सरकार की नीयत इसी बात से साफ हो जाती है कि उसने 30 दिसंबर को इस एप्लीकेशन को राजस्व विभाग को भेज दिया। इसके बाद राजस्व विभाग ने 5 जनवरी को इसे वित्त विभाग को भेज दिया जहां पहले से ही इससे संबंधित एक एप्लीकेशन लंबित पड़ी थी।

इसके अलावा जो आरटीआई एप्लीकेशन विषय से संबंधित सरकारी महकमों में लगाई जा रही हैं। उनसे भी तथ्य सामने निकलकर नहीं आ रहे हैं।

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि सरकार ने इसे जश्न के रूप में मानाने का फैसले तो ले लिया मगर जहां बच्चें बूढ़े और जवानों की मौत हुई मगर सरकार इन सब के बावजूद नोटबंदी के कारण हुई मौतों पर कुछ भी कहने से बच रही है।

बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों ने भी सबको हैरान कर दिया था। जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के बाद 99 फीसदी पुराने वोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आए हैं। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार के फैसले को कालाधन को सफेद करने वाला कदम करार दिया था।

Courtesy:  boltahindustan.

Categories: India

Related Articles

Write a Comment

Your e-mail address will not be published.
Required fields are marked*