नौकरियां जाने के पीछे नोटबंदी नहीं है, `काबिलियत` न होने के कारण लोग हुए है बेरोजगार-केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

नौकरियां जाने के पीछे नोटबंदी नहीं है, `काबिलियत` न होने के कारण लोग हुए है बेरोजगार-केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

नोटबंदी के कारण कई लोगों की नौकरी चली गई, उसमें नोटबंदी का दोष नहीं उस इंसान की गलती है जिसमें वो स्किल नहीं थी की वो अपनी नौकरी नोटबंदी से बचा पाया। ऐसा ही कुछ कहना है केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का जिन्होंने कहा है कि `अगर नोटबंदी के बाद केवल उन्ही लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी जिन्होंने अपने (स्किल) हुनर को नहीं बढ़ाया। ऐसे में नौकरियां जाने के पीछे नोटबैन नहीं है`।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल नोटबंदी के फायदे गिनाने पहुंचे थे। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये मानने से इनकार कर दिया की किसी नौकरी नोटबंदी के कारण जा सकती है।

इसी बयान के साथ ही उन्होंने साथ ही दावा करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी लागू किए जाने के बाद देश में देह व्यापार में कमी आई है।

उन्होंने कहा कि अब दलालों को नकद में भुगतान नहीं हो पाता है, जिससे वेश्यावृत्ति घटी है। केन्द्रीय मंत्री के पास ना इसे लेकर कोई सरकारी आकड़ें थे और न कोई ऐसा सुबूत जिससे वो साबित कर पाते की वाकई देह व्यापार में कमी आई है।

रविशंकर प्रसाद ने विस्तार से नोटबंदी के फायदे और उपलब्धियों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में घोटालों के आरोप भी गिनवाए। साथ ही रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि मोदी के तीन साल के शासन में कोई घोटाला नहीं हुआ है।

फिलहाल एक बात तो है की ऐसे बयान देना सत्ताधारियों का पुराना तौर तरीका रहा है। नोटबंदी के दौरान भी जैसे जैसे दिन बदल रहे थे वैसे वैसे बीजेपी के नोटबंदी के कारण बदल रहे थे।

कभी वो कहते नज़र आये की ये आतंक को रोकने के लिए है तो कभी वो कहते नज़र आये की ये जाली नोट बनाने वालों पर एक बड़ा हमला और फिर उसके बाद काला धन के खिलाफ एक मुहीम हर दिन बदलते इस बहाने के पीछें न कोई तर्क था और न ही ये बताना की हिम्मत की  आखिर नोटबंदी करने का ठोस कारण क्या था?

फिर केन्द्रीय मंत्री का नोटबंदी के एक साल पुरा होने पर ऐसा अटपटा बयान आना की नोटबंदी के कारण सिर्फ उन्हीं लोगों की नौकरी गई जो उस काबिल नहीं थे। इसमें कोई बड़ी बात नज़र नहीं आती क्योकिं नोटबंदी को लेकर ऐसे कई बयान दिए जा चुके है जो कही से तर्क आधारित नहीं थे।

गौरतलब है कि सी एम आई ई के आकड़ो के अनुसार करीब 96 लाख लोग खुद को बेरोजगार बताते हैं। जबकि नोटबंदी के बाद जनवरी-अप्रैल 2017 के बीच 15 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवा चुके है।

बता दें कि इससे पहले रेल मंत्री पियूष गोयल ने बढ़ती बेरोजगारी पर कहा था कि `बेरोजगारी` देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा लक्षण है।

courtesy: boltahindustan

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