घटेगा PF रेट, लेकिन इक्विटी इनवेस्टमेंट से मिलेगा फायदा!

घटेगा PF रेट, लेकिन इक्विटी इनवेस्टमेंट से मिलेगा फायदा!

नई दिल्ली
प्रॉविडेंट फंड सब्सक्राइबर्स को इस साल अपने रिटायरमेंट कॉरपस पर कम ब्याज मिल सकता है। हालांकि उनके अंशदान को इक्विटीज में इन्वेस्टमेंट के बदले पहली बार उन्हें यूनिट्स मिल सकती हैं। इनको मिलाकर ओवरऑल रिटर्न पिछले साल के बराबर या उससे ज्यादा हो सकता है। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक 23 नवंबर को होनी है। उसमें बोर्ड इस साल के लिए 8.5 पर्सेंट इंटरेस्ट रेट रखने पर विचार कर सकता है। वित्त वर्ष 2017 के लिए 8.65 पर्सेंट इंटरेस्ट रेट थी।

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि इसके साथ ही बोर्ड निवेश के इक्विटी वाले कंपोनेंट के लिए ईपीएफओ यूनिटाइजेशन पॉलिसी को मंजूरी दे सकता है। ईपीएफओ के निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा सरकारी सिक्यॉरिटीज में जाता है, लेकिन उससे यील्ड में कमी आई है। साथ ही ब्याज दरों में सामान्य तौर पर कमी हुई है। इन दो वजहों से ईपीएफओ को ब्याज दर घटाने का निर्णय करना पड़ सकता है। अधिकारी ने कहा कि बॉन्ड्स और एफडी जैसे डेट मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स पर रिटर्न कम रहने के कारण ईपीएफओ घटती ब्याज दरों के माहौल में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘ब्याज दर को मौजूदा स्तर पर रखना मुश्किल है क्योंकि नई सिक्यॉरिटीज कम दरों पर खरीदी जा रही हैं, जबकि 20 साल पुरानी सिक्यॉरिटीज मैच्योरिटी के करीब आ गई हैं।’

पिछले साल दिसंबर में बोर्ड ने ईपीएफ पर रेट 2016-17 के लिए 8.65 पर्सेंट करने का निर्णय किया था। 2015-16 में ब्याज दर 8.8% थी। ईपीएफओ के 5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं। बोर्ड के निर्णय के बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री यह देखती है कि ईपीएफओ ट्रस्टियों की ओर से मंजूर दर पर ब्याज अपनी इनकम से दे पाएगा या नहीं और अक्सर वह बोर्ड के निर्णय को मंजूर कर लेती है।

कैसे काम करेगी यूनिटाइजेशन पॉलिसी
ईपीएफओ अपने कॉरपस का 15% हिस्सा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के जरिए इक्विटीज में निवेश करता है। यूनिटाइजेशन पॉलिसी के तहत हर महीने होने वाले 15% इक्विटी इनवेस्टमेंट को सब्सक्राइबर्स को यूनिट्स के रूप में अलॉट किया जाएगा। इन्हें एग्जिट या प्रॉविडेंट फंड से विदड्रॉल के वक्त भुनाया जा सकेगा। इसके अलावा ईपीएफओ को इक्विटी इनवेस्टमेंट पर मिलने वाले सालाना डिविडेंड को भी इसके सब्सक्राइबर्स में बांटा जाएगा। इस तरह ओवरऑल रिटर्न ज्यादा रह सकता है। इसके बाद सब्सक्राइबर्स डेट में अपने मंथली इनवेस्टमेंट और इक्विटी में निवेश के आधार पर उन्हें अलॉट की गईं यूनिट्स को चेक कर सकेंगे।

जब कोई सब्सक्राइबर अपने पीएफ का पैसा निकालने का निर्णय करेगा तो उसके कुल निवेश का 85 पर्सेंट हिस्सा ब्याज सहित दिया जाएगा, जबकि टोटल इनवेस्टमेंट का जो 15 पर्सेंट हिस्सा इक्विटी में लगाया गया, उसे उस खास दिन तक जमा यूनिट्स में इक्विटी की वैल्यू से गुणा करके सामने आने वाली रकम के रूप में दिया जाएगा।
इसके अलावा सब्सक्राइबर के पास यह विकल्प होगा कि अगर उसे लगता है कि इक्विटी इनवेस्टमेंट से कुछ समय बाद बेहतर रिटर्न मिल सकता है तो उसे विदड्रॉल को एक-दो साल तक टालने का विकल्प भी दिया जाएगा। बोर्ड को तय करना है कि कितने वक्त तक विदड्रॉल टालने की इजाजत दी जाए।

Courtesy: NBT
Categories: Finance

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